Saturday , January 20 2018

बरतरफ़ डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर राजिया के क़लब पर हमला

बरतरफ़ डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर डॉ राजिया के क़लब पर हमला हुआ और उन्हें अपोलो हॉस्पिटल वाक़्ये ह्यदेरगुड़ा में शरीक करवाया गया था ताहम तिब्बी माअनों के बाद रात देर गए उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।

बरतरफ़ डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर डॉ राजिया के क़लब पर हमला हुआ और उन्हें अपोलो हॉस्पिटल वाक़्ये ह्यदेरगुड़ा में शरीक करवाया गया था ताहम तिब्बी माअनों के बाद रात देर गए उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।

हॉस्पिटल ज़राए के मुताबिक़ डाक्टरों की ख़ुसूसी टीम ने उनकी सेहत से मुताल्लिक़ तफ़सीली मुआइने किए और उन की हालत ख़तरा से बाहर है। हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक़ डॉ राजिया के ब्लडप्रेशर और शूगर की सतह काफ़ी बढ़ी हुई है लिहाज़ा उसे मामूल पर लाने इन की सेहत पर ख़ुसूसी तवज्जा देने के मक़सद से साबिक़ डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर डॉ राजिया को ऑब्जरवेशन में रखने का फ़ैसला किया गया था।

समझा जाता हैके डॉ राजिया ने उन्हें काबीना से बरतरफ़ करने चीफ़ मिनिस्टर के चंद्रशेखर राव‌ के इक़दाम का असर ले लिया। वो पिछ्ले दो यौम से मग़्मूम और सदमे से दो-चार दिखाई दे रहे थे। डॉ राजिया के क़रीबी ज़राए और उन के कट्टर हामीयों के मुताबिक़ डॉ राजिया ने दो शंबा के दिन ही सीने में दर्द की अपने अफ़रादे ख़ानदान से शिकायत की थी लेकिन शिद्दत की तकलीफ़ की शिकायत पर उन्हें फ़िलफ़ौर अपोलो हॉस्पिटल मुंतक़िल किया गया।

उन्हें काबीना से बरतरफ़ करदिए जाने और राज भवन में उनके ओहदे पर के श्री हरी की हलफ़ बर्दारी की इत्तेला पर वो दुख और सदमे से दो-चार होगए और किसी फ़ोन का भी जवाब नहीं दे रहे थे।

जैसे ही राजिया के क़लब पर हमले की इत्तेलाआत आम हुईं उनके कट्टर हामीयों की कसीर तादाद ने अपोलो हॉस्पिटल पहूंच कर उन की सेहत से मुताल्लिक़ दरयाफ़त किया।

इन का ये मानना था कि महिज़ चीफ़ मिनिस्टर तेलंगाना के चंद्रशेखर राव‌ की तरफ से अचानक काबीना से बरतरफ़ किए जाने के बाइस ही उनके क़लब पर हमला हुआ है। वो के सी आर पर काफ़ी ब्रहम थे। इस दौरान डॉ राजिया ने चीफ़ मिनिस्टर के चंद्रशेखर राव‌ से इन इल्ज़ामात की तहक़ीक़ात का हुक्म देने की ख़ाहिश की जिस की वजह से उन्हें काबीना से बरतरफ़ करने का फ़ैसला करना पड़ा।

डॉ राजिया ने कहा कि वो बेक़सूर हैं और तमाम इल्ज़ामात ग़लत साबित होंगे। उन्होंने मीडीया से बातचीत करते हुए ज़ात पात का मसला भी उठाया। वो बार बार दलितों बिलख़सूस माद्दीगा से अपील कररहे थे कि वो सब्र-ओ-तहम्मुल का मुज़ाहरा करें और काबीना से बरतरफ़ी पर एहतेजाज का रास्ता इख़तियार ना करें।

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