Wednesday , January 17 2018

बर्तानिया से हिंदूस्तानियों की कसीर(बडी) तादाद वापिस

लंदन। हुकूमत बर्तानिया के सख़्त इमीग्रेशन क़वानीन, मआशी कसादबाज़ारी(मंदी) और रोज़गार के मवाक़े महदूद(कम) होने की बिना(वजह से) कई हिंदूस्तानी शहरी जो गै़रक़ानूनी तौर पर यहां मौजूद थे , अब हिंदूस्तान वापिस होरहे हैं।

लंदन। हुकूमत बर्तानिया के सख़्त इमीग्रेशन क़वानीन, मआशी कसादबाज़ारी(मंदी) और रोज़गार के मवाक़े महदूद(कम) होने की बिना(वजह से) कई हिंदूस्तानी शहरी जो गै़रक़ानूनी तौर पर यहां मौजूद थे , अब हिंदूस्तान वापिस होरहे हैं।

सरकारी आदाद-ओ-शुमार के मुताबिक़ नो तशकील शूदा(नइ बनाइ गइ) टासिक फ़ोर्स ने साउथाल और दीगर मुक़ामात(दूसरी जगहों) से गै़रक़ानूनी तारीकीन ‍ए‍ वतन(वतन छोडने वालों) को कसीर(बडी) तादाद में वापिस भेज दिया है।कई हिंदूस्तानी शहरी गै़रक़ानूनी सफ़र की सऊबतें(तकलीफें) और ख़तरात का सामना करते हुए अपने ख़ाबों को पूरा करने यहां आए थे लेकिन उन्हें सल्लम बस्तीयों से भी बदतर ज़िंदगी गुज़ारने पर मजबूर होना पड़ा।

ये आदाद-ओ-शुमार के मुताबिक़ 2009 के मुक़ाबिल वापिस होने वाले गै़रक़ानूनी तारकीन-ए-वतन की तादाद में नुमायां इज़ाफ़ा हुआ है(बहुत ज्यादा बढोतरी हुइ हैं)।

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