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बर्मा के मुतास्सिरीन में ग़िज़ाई अश्या और कपड़ों की तक़सीम

हैदराबाद 03 जुलाई: बर्मा में बुद्धिस्टों की तरफ से मुसलमानों पर हमलों के शिकार कई ख़ानदान हैदराबाद में पनाह लिए हुए हैं और अहले ख़ैर हज़रात के तआवुन के मुंतज़िर हैं ताके इन ख़ानदानों की रोटी रोज़ी के इंतेज़ाम के अलावा उनकी बाज़ आबादकारी म

हैदराबाद 03 जुलाई: बर्मा में बुद्धिस्टों की तरफ से मुसलमानों पर हमलों के शिकार कई ख़ानदान हैदराबाद में पनाह लिए हुए हैं और अहले ख़ैर हज़रात के तआवुन के मुंतज़िर हैं ताके इन ख़ानदानों की रोटी रोज़ी के इंतेज़ाम के अलावा उनकी बाज़ आबादकारी मुम्किन होसके।

पुराने शहर के शाहीननगर में मुक़ीम एसे ही 46 ख़ानदानों की कसमपुर्सी को देखते हुए रोज़नामा सियासत ने उनकी इमदाद और बाज़ आबादकारी के इक़दामात का फ़ैसला किया है।

इस सिलसिले में फै़जे आम ट्रस्ट ने दस्त तआवुन दराज़ किया है। 46 ख़ानदानों के 190 से ज़ाइद अरकान को आज दफ़्तर सियासत में ग़िज़ाई अश्या-ओ-कपड़ों पर मुश्तमिल पैकेज के तहत इमदाद फ़राहम की गई।

जनाब ज़ाहिद अली ख़ां एडीटर सियासत, इफ़्तेख़ार हुसैन सेक्रेटरी ट्रस्टी फै़जे आम ट्रस्ट, जनाब ज़हीर उद्दीन अली ख़ां मैनेजिंग एडीटर सियासत आमिर अली ख़ां न्यूज़ एडीटर सियासत के अलावा माइनॉरिटी डेवलपमेंट फ़ोर्म के ओहदेदार मौजूद थे।

बर्मा मुतास्सिरीन ने उन पर किए गए मज़ालिम की दास्तां सुनाई और कहा कि वो किसी तरह अपनी ज़िंदगीयों को बचाकर हज़ारों मेल का फ़ासिला तए करके हैदराबाद पहुंचे।

वो इन दिनों हैदराबाद में शाहीननगर के इलाके में मुक़ीम हैं जहां बाअज़ अहले ख़ैर हज़रात उनकी देख भाल कररहे हैं। पिछ्ले दिनों जनाब ज़हीर उद्दीन अली ख़ां ने फै़जे आम ट्रस्ट के सेक्रेटरी इफ़्तेख़ार हुसैन के साथ बर्मा के मुतास्सिरीन के कैंप का दौरा किया था और उनके मसाइल से वाक़फ़ीयत हासिल की।

इस मौके पर सियासत और फै़जे आम ट्रस्ट ने मुशतर्का तौर पर इमदादी पैकेज की मंज़ूरी का फ़ैसला किया। पहले मरहले में इन ख़ानदानों को ग़िज़ाई अशीया ( चावल, दाल, तेल वग़ैरा )पर मुश्तमिल पैकेज हवाले किया गया।

इस के अलावा मर्द-ओ-ख़वातीन के लिए कपड़े भी तक़सीम किए गए। इमदादी पैकेज की तक़सीम के मौके पर बर्मा मुतास्सिरीन ने सियासत और फै़जे आम ट्रस्ट से इज़हार-ए-तशक्कुर किया कि उन्होंने मुसीबत की इस घड़ी में तआवुन किया है।

मुतास्सिरीन ने बताया कि वो हैदराबाद में मेहनत मज़दूरी करने तैयार हैं लेकिन ज़बान से अदम वाक़फ़ीयत के सबब उन्हें कोई मज़दूरी पर रखने से गुरेज़ कररहा है।

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