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बल्लभगढ़: मस्जिद की तामीर को अदालत ने वाजिब माना था

बल्लभगढ़: बल्लभगढ़ के अटाली गांव में फिर्कावाराना दंगे की ताज़ा वारदात से करीब दो महीने पहले ही फरीदाबाद की एक अदालत ने तनाज़ा के मरकज़ में रहे मस्जिद की तामीर पर अहम फैसला सुनाया था।

बल्लभगढ़: बल्लभगढ़ के अटाली गांव में फिर्कावाराना दंगे की ताज़ा वारदात से करीब दो महीने पहले ही फरीदाबाद की एक अदालत ने तनाज़ा के मरकज़ में रहे मस्जिद की तामीर पर अहम फैसला सुनाया था।

अपने फैसले में अदालत ने माना कि हिंदू दरखाश्तगुजार अपने इस इल्ज़ाम को किसी भी तरीके से साबित नहीं कर पाए हैं कि मजकूरा मस्जिद ग्राम पंचायत की जमीन पर गैरकानूनी तौर से बनाई जा रही है। इसी बुनियाद पर अदालत ने मस्जिद के हक़ में फैसला सुनाते हुए मस्जिद की तामीर को वाजिब ठहराया था।

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के मुताबिक, गुजश्ता 26 मई को करीब 2,000 मुसल्लह अफवाज़ शख्स ने गांव के कई मुस्लिम खानदानो के घरों और दुकानों को आग लगा दी। एक घंटे तक चली खुलेआम लूटपाट में कई मुस्लिम खानदानो का सब कुछ जलकर ख़ाक हो गया। 15 से भी ज़्यादा लोग बुरी तरह ज़ख्मी हुए। गांव के तकरीब 150 मुस्लिम खानदान बेघर होकर पुलिस थाने में पनाह लेने को मजबूर हो गए।

उस रात का ख़ौफ इन खानदानदान वालों के मन में इतना अंदर तक बैठ गया है कि पुलिस सेक्युरिटी में भी वे गांव वापस लौटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में जब कि उनकी सारी जमा-पूंजी और घर-दुकान समेत तमाम चीजें जल चुकी हों, तब वापस लौटने का ठिकाना और मतलब क्या है यह भी उनकी समझ में नहीं आ रहा है।

अटाली गांव के ही दो साकिन , 43 साल के सतीश कुमार और 31 साल के योगेंद्र, ने अदालत में मस्जिद की तामीर के गैरकानूनी होने के मुताल्लिक दरखास्त दाखिल किये थे । इन दोनों ने अपनी दरखास्त की ताईद में दलील दिया कि जहां मस्जिद की तामीर हो रही है वह जमीन ग्राम पंचायत की है।

उन्होंने इसी बुनियाद पर अदालत से यह भी कहा कि ग्राम पंचायत की जमीन पर गांव के मुसलमानों ने मस्जिद की आड़ में नाजायज़ कब्जा किया हुआ है। दोनों दरखास्तगुजारों ने अदालत से मस्जिद को गैरकानूनी ऐलान कर वह जमीन ग्राम पंचायत को वापस लौटाने की अपील की थी।

उधर, मुसलमानों का दावा है कि मजकूरा मस्जिद जिस जगह पर बनी है वह जमीन वक़्फ बोर्ड की है।
गांव के जाट तब्का ने अदालत में कहा कि जमीन का असली हक़ ग्राम पंचायत के पास ही है। उन्होंने बाद में यह भी कहा कि ग्राम पंचायत ने वह जमीन मुस्लिमों को मस्जिद के लिए नहीं, बल्कि एक कब्रिस्तान के लिए अलाट किया था थी जिसपर मुस्लिम फिर्के ने ग़लत तरीके से मस्जिद की तामीर का काम शुरू कर दिया।

31 मार्च को सुनाए गए फैसले में सिविल जज विनय शर्मा ने कहा कि पूरे मामले की बारीकी से पड़ताल करने के बाद कोर्ट इस फैसले पर पहुंची है कि यह जमीन हमेशा से ही गांव के मुस्लिम मआशरे की मिल्कियत में थी। कोर्ट ने अपने फैसले में यह तब्सिरा भी किया कि हालांकि दरखास्तगुजारो ने यह साबित करने की पूरी कोशिश की कि मजकूरा जमीन ग्राम पंचायत की प्रापर्टी है, लेकिन यह साबित करने में वह बुरी तरह से नाकाम रहे।

अटाली ग्राम पंचायत ने अदालत के फैसले के बाद फरीदाबाद के SDM से राबिता किया और उन्होंने मस्जिद की तामीर पर फौरन रोक लगाने के फैसले पर SDM की मंजूरी ले ली। मई की शुरूआत में, चंडीगढ़ के एक जिला रिवेन्यू (District Revenue) दफ्तर से आई टीम ने बल्लभगढ़ आकर पूरे मामले की पड़ताल की।

जांच पूरी होने के बाद दल ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट की बुनियाद पर SDM ने अटाली गांव के मुस्लिम फिर्के को मस्जिद की तामीर का काम फिर से शुरू करने की इजाज़त दे दी।

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