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बहराइच :हमारे यहाँ बरेलवी दफ़न करने पे मनाही नही है -देवबंदी

बहराइच में देवबंदी समाज द्वारा बरेलवी महिला को दफ़न से रोके जाने की न्यूज़ कोहराम की खबर का खंडन करते हुयें देवबंदी समाज ने अपना पक्ष आज मीडिया के सामने रखा है

कब्रिस्तान की देखरेख करने वाले क़ारी अब्दुल मुईद की तरफ से कमाल अख्तर ने सिआसत हिंदी के संवातदाता इमरोज़ रब्बही से बातचीत में कहा कि इस कब्रिस्तान में बरेलवी अपनी मय्यत को दफ़न करते रहे है और इंशाल्लाह आगे भी करते रहेंगे ,उन्होंने कहा कि मुसलमान को फिरको में बाटने वाले न्यूज़पोर्टल कोहराम ने भी लिखा है कि यहाँ बरेलवी दफ़न होते रहे है मगर इस बार बरेलवी खातून मय्यत को दफ़न करने से रोका गया गया है
अगर फिरके के आधार पे यहाँ मय्यत रोका जाना होता तो अब तक बरेलवी कैसे यहाँ दफ़न होते रहे है हम एलान करते है कि जो भी बरेलवी भाई यहाँ मय्यत लेकर आयेंगे उनको मना नही किया जायेगा .इमरोज़ रब्बही द्वारा कमाल अख्तर से जब पूछा गया कि आखिर क्यूँ खातून का दफ़न आपके शहर के कब्रिस्तान में नही हुआ जैसा कि महिला के बेटे पीर अली मिस्त्री ने भी दावा किया है तो उस पर उनका जवाब था कि ये लोग महिला का जनाज़ा लेकर कब्रिस्तान में आये थे हमारी तरफ से हाफिज मुईद ने कहा था कि आप लोग जब भी इसके बाद मय्यत यहाँ लाया करे तो हमारी इज़ाज़त ले लिया करिए ऐसा कहना गलत नही था लेकिन इस ज़नाज़े के साथ आये लोगो ने आपत्ति की और कहा इज़ाज़त की क्या ज़रूरत और जिसके बाद कहासुनी हो गयी .

जिसके बाद बरेलवी समुदाय ने कहा कि कोई ज़रूरी नही दफ़न यही किया जाये बहुत से कब्रिस्तान है कहीं दफ़न कर देंगे जिसके बाद कुछ लोगो ने रोकने की कोशिश की मगर वो लोग नही माने और ज़नाज़ा ले कर चले गये और उन्होंने ज़नाज़े को कटरा के कब्रिस्तान में ले जाकर दफ़न किया .
कमाल अख्तर कहते है घटना पर स्थानीय अखबारों ने कोई खबर नही छपी है अगर इस मामले पर उनकी बात सही होती तो अखबारों में क्यूँ नही ये खबर छापी गयी .

उनका ये भी सवाल था कुछ दिन बीत जाने के बाद मामले को फिरके का रंग देने के लियें उछाला गया कोहराम न्यूज़ बरेलवी समुदाय के कुछ लोगो की बात पे इलज़ाम पे इलज़ाम लगा रहा है और हमारी सफाई के लियें हमसे संपर्क नही कर रहा है हमें भी अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए ,मुसलमानों में एकता की ज़रूरत है लेकिन कुछ लोग एकता नही टीआरपी चाहते है

किसी बात पे बहस हो जाए और एक समुदाय मय्यत वापस लेजाये नाराज़ होकर तो हम अकेले कसूरवार कैसे हो गये ?

जब सिआसत हिंदी ने महिला के बेटे पीर मिस्त्री के दावे पे सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि वो कुछ ऐसे लोगो के बहकावे में बयान दे रहे है जो मुसलमान को पहले से अपनी तकरीरो से बाटते आये रहे है और इस मामले को तुल देकर देवबंदी और बरेलवी को एक दुसरे से दूर कर रहे है जिसको सच्चाई जानना है वो यहाँ आकर निष्पक्ष लोगो से मिलकर सच्चाई जाने वो बेहतर रहेगा ना हमारी सुने और ना उनकी सुने .
इससे पहले बरेलवी समुदाय के कुछ लोगो ने देवबंदी समुदाय द्वारा अपने कब्रिस्तान में मय्यत को दफ़न करने से रोकने का दावा किया था मृतक महिला के बेटे ने भी अपने बयान में कहा है कि हमको बरेलवी होने के वज़ह से मेरी माँ को कब्रिस्तान में देवबंदियो ने दफ़न नही होने दिया

नोट -सिआसत हिंदी किसी पक्ष के दावों की सत्यता की पुष्ठी नही करता है

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