Saturday , December 16 2017

बहाल किये जायेंगे तीन हजार ‘साइबर दारोगा’

पटना : मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘नमक के दारोगा’से लेकर अब तक दारोगा की किरदार क्राइम कंट्रोल करने, निजाम दुरुस्त करने के तौर में जानी जाती है। लेकिन, आज के बदलते जमाने में साइबर क्राइम पुलिस महकमे के सामने एक बड़ी चैलेंज बनती जा रही है।

इससे निबटने के लिए रियासत में जल्द ही तकनीकी तौर से तरबियत ‘साइबर दारोगा’ की बहाली होने जा रही है। यह आम दारोगा से बिलकुल अलग बीसीए एमसीए या कंप्यूटर इंजीनियर के तौर में ‘वेल क्वालिफायड’ होंगे। पुलिस महकमा ने इसके लिए एक अलग से ‘तकनीकी कैडर’ की तशकील करने की तजवीज दाखिला महकमा के पास भेज दिया है।

फिलहाल दाख्ला महकमा इस तजवीज पर गौर कर इसे आखरी शक्ल देने में जुटा हुआ है। हालांकि, महकमा की रफ्तार देख कर लग रहा है कि इसे हतमी तौर से एसेम्बली इंतिख़ाब के बाद ही दिया जा सकेगा और नयी हुकूमत ही इसे अमलीजामा दे पायेगी।

रियासत में साइबर जुर्म से जुड़े तीन तरह के मामले सामने आते हैं- इ-मेल के जरिये धोखाधड़ी, एटीम या क्रेडिट कार्ड के जरिये फ्रॉर्ड और फेसबुक समेत सोशल साइट्स पर परेशान करना या धोखाधड़ी करना। हाल के कुछ महीनों में पोर्नोग्राफी का इजाफा हुया है। इसे बुनियाद बना कर ब्लैकमेल या जुर्म करने के मामलों में गुजिशता तीन साल में छह गुना इजाफा हुई है। इन वजूहात से साइबर मुजरिमों पर शिकंजा कसने के लिए साइबर एक्सपर्ट की काफी जरूरत महसूस की जा रही है।

इस तकनीकी कैडर के तहत करीब तीन हजार ‘साइबर दारोगा’ की भरती की जायेगी। इसके लिए आम ग्रेजुएट नहीं, बल्कि बीसीए, एमसीए या बीटेक इन कंप्यूटर साइंस की जरूरत होगी। रियासत के तमाम 800 थानों में एक खास ‘साइबर सेल’ भी बनाया जायेगा, जिसमें 3-4 साइबर दारोगा की तैनाती की जायेगी। इनका रैंक दारोगा का ही होगा, लेकिन काम आम दारोगा से बिलकुल अलग ‘साइबर एक्सपर्ट’ का होगा।

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