Thursday , December 14 2017

बांग्लादेश ने सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई, रोहिंग्या के अवैध रूप से घुसने का डर

ढाका। बांग्लादेश ने भारत के साथ अपनी पश्चिमी सुरक्षा को बढ़ा दी है| अधिकारियों ने रविवार को बताया कि सैकड़ों रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों का सीमा की तरफ से अवैध रूप से घुसने का डर है|

उन्होंने आरोप लगाया है कि पड़ोसी मुल्क द्वारा सैकड़ों रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को अपने इलाके में धकेल दिया जा सकता है|
सीमा रक्षकों का कहना है कि भारत के पश्चिम बंगाल राज्य स्थित सीमा पर एक गश्त किया गया था|

बांग्लादेश के क्षेत्रीय कमांडर तारिकुल हाकिम का कहना है कि रोहिंग्या को पुतखली सीमावर्ती के सामने इकट्ठा किया जा सकता है| जहाँ पर एक छोटी नदी है जो दो देशों को विभाजित करती है

लेफ्टिनेंट कर्नल हाकिम ने एएफपी को बताया कि “हमने सीमा पर कड़ी निगरानी रखी है और अच्छे क़दम उठाये हैं जिससे अवैध रूप से रोहिंग्या हमारे इलाक़े में न घुस पाए|

उन्होंने पड़ोसी मुल्क का हवाला देते हुए कहा कि भारत में 40000 रोहिंग्या हैं लेकिन भारत सरकार उन्हें वापस भेजना चाहती है अदालत ने आंतरिक सुरक्षा को ये ख़तरा बताकर ये क़दम उठाया

हाकिम ने बताया कि भारत में रह रहे रोहिंग्या समुदाय अपने परिवार से मिलना चाह रहा है| जहां से अगस्त में म्यांमार से करीब पांच लाख रोहिंग्या शरणार्थियों आये थे| म्यांमार हिंसा से भागे हुए रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थी करीब 536000 थे जो वहां से अपनी जान बचाकर निकले|
संयुक्त राष्ट्र ने इसे जातीय सफाई के रूप में वर्णित किया है। लेकिन ये घटना इंसानियत को शर्मसार करती है|

ऐसा नहीं है की ये ज़ुल्म सिर्फ मुस्लिम ही सह रहे हैं बल्कि हिन्दू भी इस हिंसा का शिकार हो रहे हैं| लेकिन बताया जाता है की इसमें ज़्यादातर मुस्लिम को टारगेट किया जाता था|

पश्चिम बंगाल में एक भारतीय सीमा रक्षक ने एएफपी को बताया कि हमारे दल ने पहले सभी रोहिंग्या को स्थानीय पुलिस ने रोक दिया था।
उन्होंने कहा कि “अब हमारे निर्देश बहुत स्पष्ट हैं, और वह सभी रोहंग्या को बांग्लादेश में धकेलना है|

“हम सक्रिय काम के साथ हमारे कार्य को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।”
बांग्लादेश सीमा सुरक्षा अधिकारी अब्दुल हुसैन ने कहा कि सरहद के साथ-साथ गांवों को चेतावनी दी गई है कि अब नए शरणार्थी को सीमा पार करने के लिए भारतीय सैनिक ने उन्हें प्रोत्साहित किया है| उन्होंने कहा की “हम उन्हें रोकने के लिए सीमा के आस पास, दिन रात गश्त कर रहे हैं| इस काम में स्थानीय ग्रामीण भी हमारे साथ जुड़े हैं|

स्थानीय काउंसिल के सदस्य नज़रूल इस्लाम ने कहा कि सीमा से अधिक दक्षिण-पश्चिम के इलाक़े से भाग कर आने वाले दर्जन भर रोहिंग्या शरणार्थियों को पार कराने के लिए भारतीय गार्ड ने कांटेदार तार के एक हिस्से को खोलने की सुविधा दी है ताकि उन्हें आसानी से पार कर सकें।

उन्होंने कहा कि ‘बांग्लादेश पहले से ही कम से कम 800,000 रोहिंग्या की मेजबानी कर रहा है| जब म्यांमार में हिंसा हुई रोहिंग्या मुस्लिम भागे तो हमने शरण दी| भारत तो उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था तब हमने रोहिंग्या को शरण दी’| लेकिन भारत को रोहिंग्या शरणार्थियों को वापिस भेजने की बात कर रहा है|

उन्होंने कहा कि मुस्लिम अल्पसंख्यकों को मुख्य रूप से बौद्ध राष्ट्र में अवैध आप्रवासियों के रूप में माना जाता है।

साथ में ये भी कहा कि म्यांमार की हिंसा के बाद रोहिंग्या शरणार्थियों के लगातार आगमन पर बांग्लादेशी अधिकारियों और अनेक संगठनों पर भारी दबाव डाला गया जिसके बाद बांग्लादेश ने इस संकट को मानवता को शर्मसार करने वाली घटना के रूप में वर्णित किया है। जिसके बाद वैश्विक स्तर पर म्यांमार की आलोचना हुई|

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