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बांग्लादेश में 152 फौजियों को मौत और 160 को उम्रकैद की सजा

बांग्लादेश में ढाका की एक अदालत ने साल 2009 में बांग्लादेश राइफल्स (बीडीआर) अहलकारों के बगावत मामले में मंगल के दिन 152 जवानों को मौत की सजा और 160 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है | अदालत ने इस मामले में 271 लोगों को बरी कर दिया | फरवरी 2009 के इस बगा

बांग्लादेश में ढाका की एक अदालत ने साल 2009 में बांग्लादेश राइफल्स (बीडीआर) अहलकारों के बगावत मामले में मंगल के दिन 152 जवानों को मौत की सजा और 160 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है | अदालत ने इस मामले में 271 लोगों को बरी कर दिया | फरवरी 2009 के इस बगावत में बांग्लादेश राइफल्स के अहलकारों की तरफ से 57 आला ओहदेदारान समेत 74 लोग मारे गए थे | Border security ने Armory में हथियारों की लूटपाट की थी.

करीब 33 घंटे तक चले इस खूनखराबे के दौरान बीडीआर अहलकारों ने कत्ल के बाद लोगों की लाशों को सीवरों और पतली गुफाओं में डाल दिये थे | उन्होंने आफीसरों के घरों में लूटपाट की और उनके परिवारों के घरों में भी लूटपाट की और उनके खानदानो को बंदूक दिखाकर बंधक बनाया था | इस मामले में 813 लोगों को गिरफ्तार किया गया था | इन लोगों को राजधानी के बख्शी बाजार की अदालत में पेश किया गया | इस मामले के मुल्ज़िमों में बीएनपी का एक लीडर नसरूद्दीन अहमद पिंटू भी शामिल है |

इससे पहले दारुल हुकूमत की बख्शी बाजार की एक अदालत में सुबह 813 लोगों को पेश किया गया | इस मामले में जमानत पर चल रहे 10 और लोग भी Third Additional Metropolitan Sessions Court के जस्टिस के सामने पेश हुए |

मामले के दिगर तीन मुल्ज़िम जोहरा खातून, अब्दुस सालेम और रूना अख्तर बीएनपी कियादत की 18 अपोजिशन पार्टियों की चल रही 60 घंटे की हड़ताल के सबब अदालत में पेश नहीं हो सके | इस मामले में कुल 850 मुल्ज़िम लोगों में 823 बीडीआर जवान और 23 शहरी शामिल थे |

813 मुल्ज़िम हिरासत में थे,13 जमानत पर और 20 फरार है जबकि चार लोगों की हिरासत के दौरान मौत हो गई थी |

अदालत में मंगल के दिन जब इस मामले में फैसला सुनाया जा रहा था तो बार्डर गार्ड बंगलादेश के डायरेक्टर जनरल मेजर अजीज अहमद भी मौजूद थे | इस मामले में पहले 30 अक्तूबर को फैसला सुनाया जाना था लेकिन जज मोहम्मद अख्रूज्जमां ने फैसला सुनाये जाने की तारीख 05 नवम्बर तय की थी ताकि उनको फैसला तैयार करने के लिए और वक्त मिल सके |

जज को इस मामले में फैसला तैयार करने के लिए 654 गवाहों के बयानों वाले तकरीबन दस हजार सफहात का मुताला करना था |

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