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बाबरी मस्जिद की शहादत से मुल्क सबसे ज़्यादा मुतास्सिर

फ़ैज़ाबाद, 07 दिसंबर: (एजेंसी) बाबरी मस्जिद की शहादत से हिंदूस्तान का समाजी, सयासी और मज़हबी पहलू जितना मुतास्सिर हुआ है ग़ालिबन किसी और वाक़िये से नहीं हुआ। बाबरी मस्जिद 20 साल क़ब्ल 6 दिसंबर को शहीद की गई थी। अख़बारी नुमाइंदों की एक टीम ने ब

फ़ैज़ाबाद, 07 दिसंबर: (एजेंसी) बाबरी मस्जिद की शहादत से हिंदूस्तान का समाजी, सयासी और मज़हबी पहलू जितना मुतास्सिर हुआ है ग़ालिबन किसी और वाक़िये से नहीं हुआ। बाबरी मस्जिद 20 साल क़ब्ल 6 दिसंबर को शहीद की गई थी। अख़बारी नुमाइंदों की एक टीम ने बाबरी मस्जिद की शहादत की बीसवीं बरसी पर हाशिम अंसारी से फ़ैज़ाबाद में उनकी क़ियामगाह पर मुलाक़ात करके उनका इंटरव्यू लिया।

हाशिम अंसारी जो इस मुक़द्दमा के एक मुद्दई हैं, बहुत बरहम ( गुस्से में) हैं। खासतौर पर कांग्रेस से उनकी बरहमी बहुत ज़्यादा है। बाबरी मस्जिद की शहादत की याद में आज फ़ैज़ाबाद में सोग ( शोक) मनाया गया। अख़बारी नुमाइंदों से हाशिम अंसारी ने कहा कि कांग्रेस हिंदूस्तान के बेहतरीन तालीम याफ़ता मुसलमानों को दहशतगर्दी के मुक़द्दमात में फंसा रही है और उन्हें हलाक कर रही है।

नरेंद्र मोदी की हुकूमत पर तन्क़ीद करते हुए उन्होंने कहा कि मोदी की हुकूमत बदरजा बेहतर होगी, क्योंकि इसने तमाम मुसलमानों पर सिर्फ़ एक ही ज़रब लगाई थी और मर्कज़ में बरसर-ए-इक़तिदार आने पर वो ऐसी ही एक और ज़रब लगाएगा।

कांग्रेस यही मक़सद सुस्त रफ़्तारी से हासिल करना चाहती है। बाबरी मस्जिद की 6 दिसंबर 1992 की शहादत से हाशिम अंसारी ज़हनी दबाव का शिकार हो गए थे। उन्होंने इस तनाज़ा का तमाम फ़रीक़ैन के लिए क़ाबिल‍ ए‍ कुबूल हल तलाश करने की हर मुम्किन कोशिश की।

हाशिम अंसारी ने भास्कर न्यूज़ के नुमाइंदों से बातचीत करते हुए कहा कि वो इस मसले को ख़ुशगवार तरीक़े से हल करना चाहते थे। बाबा ज्ञान दास भी इनका साथ दे रहे थे। उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट से कभी भी रुजू होना नहीं चाहते थे। वो इस मसले का कोई हल तलाश करने से क़ासिर रहे।

इसलिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने पर उस वक़्त मजबूर हो गए जबकि हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट से रुजू किया। हाशिम अंसारी का एहसास है कि बाबरी मस्जिद का मसला दुनिया की किसी भी अदालत में तय नहीं किया जा सकता। उन्होंने सूरत-ए-हाल का तक़ाबुल एक ऐसी फ़िल्म से किया जो कभी ख़त्म नहीं हो सकती।

हाशिम अंसारी कांग्रेस की जानिब से इस पूरी सूरत-ए-हाल से निपटने के तरीक़ा पर उलझन ज़दा थे। उन्होंने कहा कि हुकूमत ने अहाता को महफ़ूज़ करने के लिए रक़म ख़र्च की। ये रक़म ग़रीबों का पेट भरने के काम आ सकती थी। उन्होंने सलमान ख़ुरशीद, ग़ुलाम नबी आज़ाद, के रहमान ख़ान और ई अहमद पर इल्ज़ाम आइद किया कि वो हिंदूस्तान में मुस्लिम तबक़ा की हालत के ज़िम्मेदार हैं।

हाशिम अंसारी ने मज़ीद कहा कि कांग्रेस हुकूमत रोज़ाना 25 लाख रुपये मुतनाज़ा इलाक़ा को महफ़ूज़ बनाने के लिए ख़र्च कर रही है जबकि हज़ारों अफ़राद रोज़नामा भूख से मर रहे हैं। इस मुल्क के मुसलमान उस दिन तक आराम से नहीं बैठ सकते जब तक कि सलमान ख़ुरशीद, ग़ुलाम नबी आज़ाद और अहमद पटेल हिंदूस्तान में बरसर-ए-इक़तिदार हैं।

उत्तर प्रदेश के मुमताज़ शहरों में बाबरी मस्जिद की शहादत की बीसवीं बरसी पर सख़्त हिफ़ाज़ती इंतेज़ामात किए गए थे। ताहम अयोध्या के मज़हबी क़ाइदीन ने कहा कि अमन की बरक़रारी ज़रूरी है और माज़ी की शिकायात को पसेपुश्त डाल दिया जाना चाहीए।

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