बाबरी मस्जिद कुछ यूँ बहस में आई

बाबरी मस्जिद कुछ यूँ बहस में आई
नई दिल्‍ली, 05 दिसंबर: बाबरी मस्जिद की तामीर 1527 में हुई और 1992 में शहीद कर दी गई। अयोध्या के रामकोट पहाड़ी पर बनी यह मस्जिद राम की जन्म भूमि के बतौर तनाजे में रही |

नई दिल्‍ली, 05 दिसंबर: बाबरी मस्जिद की तामीर 1527 में हुई और 1992 में शहीद कर दी गई। अयोध्या के रामकोट पहाड़ी पर बनी यह मस्जिद राम की जन्म भूमि के बतौर तनाजे में रही |

आजाद हिंदुस्तान में इस तारीखी तनाज़ात की पैदाईश तब हुआ, जब 22-23 दिसंबर, 1949 की रात मुबय्यना तौर पर मस्जिद के अंदर चोरी-छिपे मूर्तियां रखी गईं। अगली सुबह अयोध्या पुलिस थाने में इसकी एफआईआर दर्ज कराई गई।

बाबरी मस्जिद के अंदर मूर्तियां रखे जाने की खबर सुनकर उस वक्त के वज़ीर ए आज़म जवाहर लाल नेहरू ने उत्‍तर प्रदेश के वज़ीर ए आला गोविंद बल्लभ पंत को यह हुक्म दिया कि वे मूर्तियों को हटा ले। हालांकि ऐसा हो नहीं सका।

1984 तक यह झगड़ा शांत रहा। 1984 में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने मस्जिद के ताले खुलवाने के लिए तहरीक शुरू किया और 1985 में राजीव गांधी की हुकूमत ने अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद का ताला खोल देने का हुक्म दिया।

इसके बाद इलाके में फिर्कावाराना कशीदगी उस वक्त बहुत ज़्यादा बढ़ गया जब नवंबर 1989 में लोक सभा इलेक्शन से पहले विहिप को मुतनाजा मुकाम पर बुनीयाद करने की इज़ाज़त दी गई।

1992 में बीजेपी लीडर लालकृष्ण आडवाणी ने एक रथ पर सवार होकर जुनूबी से अयोध्या तक की 10,000 किमी के सफर की शुरुआत की।

इस रथ यात्रा के नतीज़े के तौर पर मुल्क भर से हजारों कारसेवक मंदिर की तामीर के मकसद से अयो‌ध्या में इकट्ठा हुए। कारसेवकों ने 6 दिसंबर 1992 को यह मस्जिद शहीद कर द‌ी गई।

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