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बाबरी मस्जिद मामले में विभिन्न अदालतों में शिया वक्फ बोर्ड की तरफ से फर्जी वकील खड़े किए गये हैं : वसीम रिजवी

लखनउ : शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के साथ संयुक्त रूप से संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि अयोध्या विवाद की अदालती कार्यवाही के दौरान उनके बोर्ड को यह पता ही नहीं लग सका कि अदालत में उसका कोई वकील भी खड़ा है. इस मामले में विभिन्न अदालतों में उसकी तरफ से फर्जी वकील खड़े किए जाने का आज आरोप लगाते हुए इसकी जांच की मांग की.

उन्होंने दावा किया कि जब संबंधित फाइलों का मुआयना किया गया तो पता लगा कि अदालतों में ऐसे वकील खड़े किए गए जिनके नाम शिया वक्फ बोर्ड की तरफ से कोई वकालत नामा भी नहीं था. रिजवी ने सरकार से इस प्रकरण की जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्वाई की मांग की है.

उन्होंने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड पर अयोध्या विवाद मामले में अचानक सक्रिय होने का आरोप लगाया जा रहा है जबकि सच्चाई यह है कि उसे पता ही नहीं था कि अदालत में उसकी तरफ से वकील खड़े किए गए हैं. सरकार इस बात की जांच करें कि शिया वक्फ बोर्ड की तरफ से ऐसे वकीलों को किसने खड़ा किया, जिन्होंने अदालत में इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.

रिजवी ने बताया कि उन्होंने अयोध्या विवाद के हल के लिए शिया वक्फ बोर्ड द्वारा तैयार किया गया प्रस्ताव गत 18 नवंबर को उच्चतम न्यायालय में दाखिल कर दिया है. उन्होंने दावा किया कि शिया वक्फ बोर्ड की तरफ से जो फार्मूला पेश किया गया है वह दुनिया का सबसे बेहतरीन फार्मूला है.

रिजवी कहा कि शिया वक्फ बोर्ड बाबरी मस्जिद का मुतवल्ली होने के नाते उस जमीन से अपना अधिकार, अपना दावा छोड़ रहा है. बोर्ड की मंशा है कि अयोध्या के बजाए लखनऊ के हुसैनाबाद इलाके में मस्जिद-ए-अमन का निर्माण कराया जाए. शिया वक्फ बोर्ड ने इसके लिए सरकार से जमीन की गुजारिश की है.

विवादित स्थल पर उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज करते हुए रिजवी ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सितंबर 2010 में दिए गए फैसले में जो एक तिहाई जमीन दी थी वह सुन्नी वक्फ बोर्ड को नहीं बल्कि मुस्लिम पक्ष को दी थी.

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