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बाबरी मस्जिद मुक़द्दमा, दरख़ास्त दाख़िल करने में ताखीर पर बहस‌

नई दिल्ली, 17 अप्रैल: सी बी आई ने आज सुप्रीम कोर्ट से कहा कि बाबरी मस्जिद केस में बी जे पी लीडर एल के अडवानी और दूसरों के ख़िलाफ़ साज़िश के इल्ज़ामात से मुताल्लिक़ इलहाबाद हाइकोर्ट के हुक्म के ख़िलाफ़ अपील दाखिल‌ करने में ताख़ीर को माफ़ ना क

नई दिल्ली, 17 अप्रैल: सी बी आई ने आज सुप्रीम कोर्ट से कहा कि बाबरी मस्जिद केस में बी जे पी लीडर एल के अडवानी और दूसरों के ख़िलाफ़ साज़िश के इल्ज़ामात से मुताल्लिक़ इलहाबाद हाइकोर्ट के हुक्म के ख़िलाफ़ अपील दाखिल‌ करने में ताख़ीर को माफ़ ना करना एक ऐसा नुक़सान है जिस की भरपाई नहीं हो सकती।

सी बी आई ने जस्टिस एच एल दत्तू और जस्टिस जे एस केहर पर मुश्तमिल बैंच पर ये दलाइल पेश किये कि इलहाबाद हाइकोर्ट के हुक्म के ख़िलाफ़ अदालते उज़्मा से रुजू होने में ताख़ीर को माफ़ किया जाना चाहिए। और अडवानी-ओ-दूसरों के ख़िलाफ़ उस की अपील की तरजीही बुनियादों पर समाअत की जानी चाहिए, लेकिन‌ इस बैंच‌ ने कहा कि अडवानी और दूसरों के दलाइल की समाअत के बाद ही ताख़ीर पर माफ़ी के बारे में कोई फ़ैसला किया जा सकता है।

अडवानी और दूसरों ने ताख़ीर की बुनियाद पर सी बी आई की दरख़ास्त को ख़ारिज करने की अपील की। सी बी आई की तरफ़ से 167 दिनों की ताख़ीर की माफ़ी के साथ रुजू होने वाले वकील पी पी राव‌ से बैंच ने कहा कि आम मुक़द्दमात में हम ऐसा कर सकते हैं, लेकिन इस मुक़द्दमे में फ़रीक़ सानी की तरफ़ से एतराज़ात किए गए हैं। चुनांचे हम पहले इस मसले पर तमाम फ़रीक़ैन के दलाइल की समाअत करेंगे।

इस बैंच ने मुक़द्दमे की आइन्दा समाअत की तारीख़ 17 जुलाई मुक़र्रर की है। सी बी आई ने अपने हलफ़नामे में कहा था कि अगर ताख़ीर को माफ़ नहीं किया गया तो इस से इंसाफ़ की नाकामी होगी, क्योंकि संगीन जराइम के मुल्ज़िमीन मुक़द्दमे का सामना करे बगै़र ही छुट जाएंगे। सी बी आई के हलफ़नामे में कहा गया है कि ख़ुसूसी दरख़ास्त रुख़सत (एस एल पी) दाख़िल‌ करने में दानिस्ता ताख़ीर नहीं की गई।

इस मुक़द्दमे में ख़ुसूसी दरख़ास्त रुख़सत दायर करने में होने वाली ताख़ीर को अगर माफ़ नहीं किया जाता है तो ये नाक़ाबिले तलाफ़ी नुक़्सान का सबब होगा और इस से मुमलिकत के जज़बात मजरूह होंगे और संगीन जराइम के मुल्ज़िमीन को इंसाफ़ के कटहरे में लाए बगै़र छोड़ देना दरअसल इंसाफ़ की नाकामी होगी। और इस दरख़ास्त दाख़िल‌ करने का मक़सद ही फ़ौत होजाएगा। ताख़ीर इस वजह से हुई कि अपील करनेवाली फ़रीक़ ख़ुद मुमलिकत है।

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