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बाबरी मस्जिद शहादत का दिन पुरअमन गुज़र गया

लखनऊ, 07 दिसंबर: ( पी टी आई) बाबरी मस्जिद की शहादत का दिन अयोध्या और फ़ैज़ाबाद के इलावा मज़ाफ़ाती इलाक़ों में सख़्त हिफ़ातती इंतेज़ामात के दौरान पुरअमन गुज़र गया । मुसलमानों की दूकानें और कारोबारी इदारे जुज़वी तौर पर बंद रहे और अहम बाज़ार व

लखनऊ, 07 दिसंबर: ( पी टी आई) बाबरी मस्जिद की शहादत का दिन अयोध्या और फ़ैज़ाबाद के इलावा मज़ाफ़ाती इलाक़ों में सख़्त हिफ़ातती इंतेज़ामात के दौरान पुरअमन गुज़र गया । मुसलमानों की दूकानें और कारोबारी इदारे जुज़वी तौर पर बंद रहे और अहम बाज़ार वीरान नज़र आ, ये क्योंकि फ़ैज़ाबाद में हफ़तावारी तातील ( छुट्टी) का दिन था ।

चंद मस्जिदों पर स्याह ( काला) पर्चम लहराए गए थे । हफ़तावारी मुक़ामी बाज़ारों में अवाम का हुजूम था, क्योंकि शादीयों का सीज़न है । सरकारी ज़राए के बमूजब दोनों तबक़ात ने आज का दिन अपने अपने अंदाज़ में अलैहदा तौर पर मनाया । हालाँकि हिफ़ाज़ती इंतेज़ामात सख़्त कर दिए गए थे और अयोध्या फ़ैज़ाबाद के शहरों के हस्सास मुक़ामात पर सख़्त चौकसी इख्तेयार की गई थी ।

मुस्लिम तंज़ीमों ने आज का दिन यौम-ए-स्याह और हिंदू तंज़ीमों ने शौर्य दीवस (यौम शुजाअत) के तौर पर मनाया । वीएचपी की ज़ेर-ए-क़ियादत कारसेवक पुरम में सुबह के वक़्त हनूमान चालीसा का जाप किया गया और मुतनाज़ा मुक़ाम पर राम मंदिर की तामीर का अह्द किया गया ।

पुलिस फ़ोर्स कसीर तादाद में चौराहे पर चौबीस घंटे चौकसी रखी गई थी ताहम सूरत-ए-हाल पुरअमन रही । बाबरी मस्जिद शहादत मुक़द्दमा के फ़रीक़ हाशिम अंसारी से रब्त पैदा करने पर उन्होंने कहा कि दोनों तबक़ात के दरमयान कोई दुश्मनी नहीं है । बाबरी मस्जिद मुक़द्दमा के नाम पर सियासत चलाई जा रही है लेकिन दोनों तबक़े के अवाम अमन चाहते हैं ।

उन्होंने अदालती कार्रवाई पर भरपूर एतिमाद का इज़हार करते हुए कहा कि अब मुआमला अदालत के हाथों में है । लखनऊ में कई मुस्लिम तंज़ीमों ने असेंबली के रूबरू एहतिजाजी मुज़ाहिरा किया और मस्जिद की दुबारा तामीर और इन्हिदाम के ख़ातियों को सज़ा देने का मुतालिबा किया ।

सोलहवीं सदी ईसवी की बाबरी मस्जिद 6 दिसंबर 1992 को हिंदू बुनियाद परस्तों ने शहीद कर दी थी । मुक़द्दमा के दोनों फ़रीक़ मुक़द्दमा से बेज़ार नज़र आए । 90 साला महंत भास्कर दास जो हिंदुओं के कलीदी मुद्दई और 92 साला हाशिम अंसारी कलीदी मुस्लिम मुद्दई दोनों ऐसा मालूम होता था कि इस मसला से थक गए हैं ।

निर्मोही अखाड़ा के महंत भास्कर दास ने अख़बारी नुमाइंदों से बातचीत करते हुए कहा कि ज़ीरीं अदालत में मुक़द्दमा इतना तवील था कोई भी नहीं कह सकता कि सुप्रीम कोर्ट का क़तई फ़ैसला होने तक मज़ीद कितना अर्सा लगेगा । में इस मसला से बेज़ार आ चुका हूँ और इसके बारे में बातचीत भी नहीं करना चाहता ।

मुहम्मद हाशिम अंसारी ने इस सवाल पर कोई भी जवाब देने से इनकार कर दिया ।

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