Tuesday , December 12 2017

बालकृष्णन के ग़ीरमहसोबा असासा जात पर मर्कज़ से वज़ाहत तलबी

सुप्रीम कोर्ट ने आज मर्कज़ी हुकूमत को हिदायत की है कि वो अदालत को इन तफ़सीलात से वाक़िफ़ करवाए जिस में साबिक़ चीफ़ जस्टिस आफ़ इंडिया और एन एच आर सी सरबराह के जी बालाकृष्णन की ग़ीरमहसोबा इमलाक की तहक़ीक़ात की गई है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने आज मर्कज़ी हुकूमत को हिदायत की है कि वो अदालत को इन तफ़सीलात से वाक़िफ़ करवाए जिस में साबिक़ चीफ़ जस्टिस आफ़ इंडिया और एन एच आर सी सरबराह के जी बालाकृष्णन की ग़ीरमहसोबा इमलाक की तहक़ीक़ात की गई है या नहीं।

चीफ़ जस्टिस एस एच कपाडि़या की क़ियादत में एक बंच ने हुकूमत से कहा है कि वो साबिक़ चीफ़ जस्टिस आफ़ इंडिया के ख़िलाफ़ उन की आमदनी से ज़्यादा दौलत और असासा जात जिन की मालियत 40 करोड़ रुपय बताई गई है, की तहक़ीक़ात कर चुकी है या मुस्तक़बिल क़रीब में तहक़ीक़ात का आग़ाज़ किया जाएगा।

ये वो तफ़सीलात हैं, जिन्हें हुकूमत को सुप्रीम कोर्ट के हवाले अंदरून एक माह करना है। याद रहे कि इस मुआमला को हुकूमत से दस माह क़बल ही रुजू किया गया था, लेकिन इस पर हनूज़ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है और शायद इसी लिए सुप्रीम कोर्ट ये जानने का ख़ाहां है कि हुकूमत आख़िर क्या कर रही है? बंच ने अटार्नी जनरल जी ई वाहना वित्ती को हिदायत दी हैकि इस मुआमला पर अंदरून एक माल मुकम्मल तफ़सीलात फ़राहम की जाएं, जिस पर मिस्टर वाहना वित्ती ने अदालत को तीक़न दिया कि वो इस दरख़ास्त पर ग़ौर-ओ-ख़ौज़ करते हुए तमाम मुताल्लिक़ा हुक्काम से राबिता क़ायम करेंगे।

याद रहे कि अदालत दरअसल मफ़ाद-ए-आम्मा की एक दरख़ास्त की समाअत कर रही है जो एन जी ओ कॉमन काज़ की जानिब से दाख़िल की गई है, जिसमें ये ख़ाहिश की गई है कि साबिक़ चीफ़ जस्टिस जिन के पास उन की मालूम आमदनी से ज़्यादा असासा जात हैं जो यक़ीनन ग़ीरमहसोबा हैं। इन की तहक़ीक़ात करवाई जाए। जस्टिस बालकृष्णन को जून 2000 में सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया था जबकि 14 जनवरी 2007 वो चीफ़ जस्टिस आफ़ इंडिया के जलील-उल-क़दर ओहदा पर फ़ाइज़ हुए थे।

TOPPOPULARRECENT