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बालापुर‌ की शहीद करदा क़ुतुब शाही मस्जिद का इसी मुक़ाम पर

हैदराबाद ।21 अप्रैल : ( नुमाइंदा ख़ुसूसी ) : 17 जनवरी 2012 -ए-को दिन धाड़े अपनों के हाथों शहीद की गई बालापुर‌ की मज़बूत-ओ-मुस्तहकम 400 साला क़दीम क़ुतुब शाही मस्जिद का आज 4-30 बजे वक़्फ़ बोर्ड सदर नशीन मौलाना अफ़ज़ल बिया बानी ख़ुसरो पाशाह के हाथ

हैदराबाद ।21 अप्रैल : ( नुमाइंदा ख़ुसूसी ) : 17 जनवरी 2012 -ए-को दिन धाड़े अपनों के हाथों शहीद की गई बालापुर‌ की मज़बूत-ओ-मुस्तहकम 400 साला क़दीम क़ुतुब शाही मस्जिद का आज 4-30 बजे वक़्फ़ बोर्ड सदर नशीन मौलाना अफ़ज़ल बिया बानी ख़ुसरो पाशाह के हाथों संग-ए-बुनियाद रखा गया ।

इस मौक़ा पर मीडीया के नुमाइंदे और चंद मुक़ामी हज़रात भी मौजूद थे । संग-ए-बुनियाद की इफ़्तिताही तक़रीब का इख़तताम मौलाना हस्सान फ़ारूक़ी इमाम-ओ-ख़तीब मस्जिद मर्दे मुनव्वरा , मदीना मार्किट-ओ-सदर सुनी दावत इस्लामी आंधरा प्रदेश की दुआ पर हुआ । मस्जिद के संग-ए-बुनियाद के बाद सदर नशीन वक़्फ़ बोर्ड ने मीडीया के नुमाइंदों से कहा कि जनाब यसीन नाम के एक शख़्स ने मस्जिद के तामीर की पूरी ज़िम्मेदारी ली है ।

वो अपने ज़ाती मसारिफ़ से मस्जिद तामीर करेंगे नीज़ इस मस्जिद की तकमील एक साल के अंदर अंदर होजाएगी । जब उन से सवाल किया गया कि वज़ीर-ए-क़लीयती बहबूद जनाब अहमद अल्लाह ने 19 जनवरी को शहीद मस्जिद के मलबा पर खड़े हो कर ऐलान किया था कि मस्जिद की तामीर के लिए कोई चंदा वसूल ना किया जाय वक़्फ़ बोर्ड एक हफ़्ता के अंदर तामीरी काम का आग़ाज़ करदेगा और पूरी मस्जिद वक़्फ़ बोर्ड की निगरानी में तामीर होगी ।

तो अब ये यसीन नामी शख़्स क्यों मस्जिद तामीर कर रहे हैं तो सदर नशीन वक़्फ़ बोर्ड का जवाब था कि ये सवाल जनाब अहमद अल्लाह से किया जाना चाहिए । वाज़िह रहे कि 5 मार्च कोरोज़नामा सियासत ने एक रिपोर्ट शाय की थी कि बालापुर ( माला पर ) की शहीद करदा क़ुतुब शाही मस्जिद की तामीर आख़िर कब ? 17 जनवरी को मस्जिद शहीद करने के बाद 20 अप्रैल को संग-ए-बुनियाद रखना और इस तवील अर्सा में वक़्फ़ बोर्ड का ख़ामोशी इख़तियार करना कई सवालात खड़े करता है ।

मज़ीद हैरत की बात ये है कि इस मौक़ा पर मस्जिद की शहादत में मुलव्वस अफ़राद के रफ़क़ा ही थे जो एक और सवालिया निशान खड़ा करता है । बहर-ए-कैफ़ मस्जिद का संग-ए-बुनियाद रख दिया गया और ये भी देखा गया कि मस्जिद के अतराफ़ में प्लाटिंग के लिए सिरे से पत्थर की सिलें नसब की गईं जिस से ऐसा लगता है कि यहां प्लाट फ़रोख्त‌ किए जा रहे हैं । क़ारईन इस मौक़ा पर एक ग़ैर मुस्लिम बिल्डर को शुरू से आख़िर तक ग़ैरमामूली नक़ल-ओ-हरकत में देखा गया ।।

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