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बाला पूर (मल्ला पूर ) की शहीद करदा क़ुतुब शाही मस्जिद की तामीर आख़िर कब?

अबू एमल चंद नाआक़बत अंदेश मफ़ाद परस्त और नाम नेहाद मुस्लमानों ने 17 जनवरी मंगल की सहपहर इस घनाउनी हरकत का इर्तिकाब किया, जिस से साकेनीन फ़र्श से लेकर हामेलीन अर्श तक सकता में पड़ गए। बाला पूर (मल्ला पूर ) की तक़रीबन 400 साला क़दीम तारी

अबू एमल चंद नाआक़बत अंदेश मफ़ाद परस्त और नाम नेहाद मुस्लमानों ने 17 जनवरी मंगल की सहपहर इस घनाउनी हरकत का इर्तिकाब किया, जिस से साकेनीन फ़र्श से लेकर हामेलीन अर्श तक सकता में पड़ गए। बाला पूर (मल्ला पूर ) की तक़रीबन 400 साला क़दीम तारीख़ी क़ुतुब शाही मस्जिद को दिन धाड़े ज़मीन दोज़ कर के इन बदनसीबों ने अपनी ईमानी कमज़ोरी और दीन बेज़ारी का सबूत दिया। इस इंतिहाई अफ़सोसनाक, नाक़ाबिल-ए-यक़ीन और रुसवा-कुन हरकत पर पूरे शहर में सदमे की लहर दौड़ गई और मुस्लमानों की आँखें उस हादिसा से नम होगईं। लैंड गिरा बरस माफ़याओं ने मस्जिद की ख़सता हाली का बेबुनियाद बहाना बनाकर उसे मिस्मार करदिया,

हालाँकि शहादत से चंद रोज़ कब्ल रोज़नामा सियासत हैदराबाद में शाय शूदा मस्जिद की तस्वीर से वाज़ेह है कि मस्जिद इंतिहाई ख़ूबसूरत, पुख़्ता, मज़बूत और मुस्तहकम हालत में थी। इन का ये दावा कि तौसीअ-ओ-तजदीद केलिए मस्जिद को शहीद किया गया है, हम ने कल भी इस का एतराफ़ किया था और आज भी करते हैं, लेकिन इस के लिए इस्लामियान-ए-दक्कन की अज़मत-ए-रफ़्ता की यादगार और मज़बूत और मुस्तहकम हाल में खड़े तारीख़ी दरबार-ए-अलहाई को मुनहदिम करने की क्या ज़रूरत थी,

दरहक़ीक़त इस के पीछे ये अवामिल कारफ़रमा थे कि इस क़ुतुब शाही क़दीम मस्जिद का ढांचा हमेशा इस बात की शहादत देता रहे ताकि ये मस्जिद वक़्फ़ है और ये ओक़ाफ़ी जायदाद है जो प्लॉट्स के ख़रीदारों और यहां इक़ामत इख़तियार करने वालों के दिलों में हर वक़त खटकता रहेगा।

इस ख़दशा के अज़ाले के लिए इन लैंड गराबरस ने क़दीम मस्जिद की तस्वीर मसख़ करने की कोशिश की ताकि औक़ाफ़ अराज़ी की कोई अलामत बाक़ी ना रहे। एक तरफ़ तो उन लैंड गराबरस ने मस्जिद शहीद करके मुस्लमानों के क़ुलूब ज़ख़मी किए तो दूसरी तरफ़ मुस्लमानों के जज़बात-ओ-एहसासात रखने वाले रहनुमाओं ने भी धोका में रख कर उन्हें कुछ कम तकलीफ़ नहीं पहुंचाई। याद रहे कि वक़्फ़ बोर्ड अहलकारों, अमला महकमा रेवेन्यू, पुलिस के आला आफ़िसरान और सर्वर नगर डिप्टी कलक्टर के हमराह वज़ीर-ए-अक़लीयती बहबूद जनाब मुहम्मद अहमद उल्लाह ने शहीद मस्जिद के मलबा पर खड़े होकर 19 जनवरी को पुरजोश अंदाज़ में ये ऐलान किया था कि बहुत जल्द मस्जिद की तामीर का आग़ाज़ करदिया जाएगा, जबकि आज मस्जिद की शहादत के तक़रीबन 50 दिन पूरे होने वाले हैं, अभी तक तामीर तो क्या, संग-ए-बुनियाद के नाम पर एक पत्थर भी नहीं रखा गया।

आख़िर कौनसी चीज़ रुकावट बनी हुई है कि अब तक अल्लाह के घर की तामीर शुरू नहीं हुई। इसी तरह अवाम की भारी जमईयत और मीडीया के कसीर नुमाइंदों के रूबरू वज़ीर-ए-अक़लीयती बहबूद ने साइबराबाद पुलिस कमिशनर को बज़रीया फ़ोन कहा कि जब तक मस्जिद तामीर नहीं होजाती, मुजरिमीन को सख़्त से सख़्त सज़ा दी जाय और किसी सूरत उन को रिहा ना किया जाय। सदर नशीन वक़्फ़ बोर्ड मौलाना अफ़ज़ल ब्याबानी ख़ुसरो पाशाह ने 25 जनवरी को शहीद मस्जिद का दौरा किया और ज़ोहर की नमाज़ की इमामत भी आप ही ने की।

सदर नशीन वक़्फ़ बोर्ड ने भी वहां इस बात का तय्क्कुन दिया कि एक हफ़्ता के अंदर मस्जिद की तामीर शुरू हो जाएगी। मस्जिद की शहादत के बाद पहले जुमा को शहर के कोना कोना से मुस्लमानों का सेल रवां जौक़ दर जौक़ हज़ारों की तादाद में जुमा की नमाज़ अदा करने के लिए वहां हाज़िर हुआ, लेकिन पिछले जुमा को सिर्फ 25 मोस्लियों ने वहां जुमा अदा किया। वहां ना तो वुज़ू के लिए पानी का नज़म है और ना ही मस्जिद की जाय नमाज़ों का कोई पुर्साने हाल है।

क़ारईन! उन लैंड गराबरस की जुर्रत और हटधर्मी की दाद देनी होगी कि उन्हों ने एक बार फिर नए सिरे से प्लाटिंग शुरू कर दी है बल्कि पत्थर के नए सेल नसब करके वो प्लाटिंग मुकम्मल भी करचुके हैं और जगह जगह प्लाटिंग की फ़रोख़त के बयानरस भी लगाए जा चुके हैं। ध्यान रहे कि अगर मस्जिद की तामीर का आग़ाज़ जल्द अज़ जल्द नहीं हुआ तो जिस तरह आज हम ने अब तक के हालात पर मुश्तमिल रिपोर्ट शाय की है। चंद रोज़ बाद भी इस तरह की रिपोर्ट उस वक़्त के हालात-ओ-कवाइफ़ के साथ मंज़रे आम पर लाकर अवाम की अदालत में पेश करेंगे। ज़्यादा दिनों तक अवाम को धोके में नहीं रखा जा सकता। [email protected]

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