Tuesday , December 12 2017

बाज़ आबाद कारी केलिए लीबिया को हिंदूस्तान की पेशकश

नई दिल्ली 22 अक्टूबर (एजैंसीज़) हकूमत-ए-हिन्द कर्नल कज़्ज़ाफ़ी की मौत पर कोई तबसरा नहीं कररही ही। ताहम इस ने फ़्रांस के इश्तिराक से लीबिया के टरानज़ीशनल कौंसल को मदद पहुंचाने पर इत्तिफ़ाक़ राय का इज़हार किया है।

नई दिल्ली 22 अक्टूबर (एजैंसीज़) हकूमत-ए-हिन्द कर्नल कज़्ज़ाफ़ी की मौत पर कोई तबसरा नहीं कररही ही। ताहम इस ने फ़्रांस के इश्तिराक से लीबिया के टरानज़ीशनल कौंसल को मदद पहुंचाने पर इत्तिफ़ाक़ राय का इज़हार किया है।

वज़ीर-ए-ख़ारजा ऐस ऐम कृष्णा और उन के फ़्रांस के हम मंसब एलाइन जपी ने नई दिल्ली में बताया कि तबाह शूदा लीबिया को बाज़ आबाद कारी की ज़रूरत है।

उन्होंने मज़ीद कहा कि ये दोनों ममालिक ने नैशनल टरानज़ीशन कौंसल की मदद करने पर इत्तिफ़ाक़ राय किया है जोकि लीबिया के अवाम की नुमाइंदगी करता है ताकि आज़ाद लीबिया में जमहूरी इक़दार की बहाली को मुम्किन बनाया जा सके और इंसानी हुक़ूक़ की पासदारी अमल में लाई जा सकी।

साथ ही इस तबाह शूदा मुल़्क की बाज़ आबाद कारी भी की जा सकी। फ़्रांस क़ज़ाफ़ी के ख़िलाफ़ बैन-उल-अक़वामी मुख़ालिफ़ीन ममालिक में सर-ए-फ़हरिस्त था, जबकि हिंदूस्तान बेदिली से इस की मदद कररहा है और इस की हिमायत कर रहा है।

हिंदूस्तान ने अक़वाम-ए-मुत्तहिदा सीकोरीटी कौंसल 1970 और 1973 के क़रारदाद मैं ख़ुद को शामिल नहीं किया था और इस से अलग थलग रखा था। ये क़रारदाद लीबिया में नाटो ऐक्शण के तौर पर शुरू किया गया था।

मुसलसल लीबिया में जंग-ओ-जदाल-ओ-खूनखराबे के बाइस हिंदूस्तान को इस बात का ख़ौफ़ था कि ये मुल़्क ख़ानाजंगी में तबदील होजाएगा और यही वजह थी कि हाल ही में हिंदूस्तान ने बशारालासद के ख़िलाफ़ मंज़ूर किए गए क़रारदाद मैं ख़ुद को अलग थलग रखा था।

TOPPOPULARRECENT