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बिना काम कराये हर माह एक करोड़ की अदायगी

रियासत हुकूमत एक साल से स्टेट इंडस्ट्रियल सिक्यूरिटी फोर्स (एसआइसीएफ) के 680 जवानों को बैठा कर तंख्वाह दे रही है। वज़ीरे आला हेमंत सोरेन ने 10 सितंबर को हुक्म दिया था कि एसआइसीएफ के जवानों को ड्यूटी दी जाये। तैनाती के लिए दस्तूरुल अमल

रियासत हुकूमत एक साल से स्टेट इंडस्ट्रियल सिक्यूरिटी फोर्स (एसआइसीएफ) के 680 जवानों को बैठा कर तंख्वाह दे रही है। वज़ीरे आला हेमंत सोरेन ने 10 सितंबर को हुक्म दिया था कि एसआइसीएफ के जवानों को ड्यूटी दी जाये। तैनाती के लिए दस्तूरुल अमल तैयार की जाये।

हालत यह है कि हुक्म के चार माह बाद भी पुलिस हेड कुवर्टर ने दस्तूरुल अमल नहीं बनायी है। यहां कबीले ज़िक्र है कि बिना दस्तूरुल अमल बनाये किसी सनअति यूनिट की सेक्युर्टी में जवानों की तैनाती मुमकिन नहीं है। दस्तूरूल अमल में यह भी ज़िक्र रहेगा कि अदारों से किस शरह पर पेमेंट लिया जायेगा।

मालूम हो कि सानअति की हिफाजत देने के लिए साल 2010 में हुकूमत ने एसआइसीएफ की बटालियन बनाने का फैसला लिया था। साल 2011 में तकर्रुरी अमल पूरी होने के बाद जवानों को बोकारो में पहले बुनियादी तरबियत दिया गया था। बाद में सीआइएसएफ, रांची के तरबियत से तीन महीने की खास ट्रेनिंग दिलायी गयी। इसके बाद से तमाम जवानों को एसआइसीएफ के हेड क्वार्टर बोकारो में रखा गया है। बोकारो में वे बिना काम के रह रहे हैं। हर माह उनके तंख्वाह पर एक करोड़ से ज़्यादा का खर्च आ रहा है। पुलिस के एक अफसर के मुताबिक, तंख्वाह मद में अब तक करीब 13 करोड़ रुपये खर्च आ चुका है।

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