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“बिन लादेन ने जामे शहादत अपनाई” शख़्सी मुहाफ़िज़ के सनसनीखेज़ इन्केशाफ़ात

क़ाहिरा, 29 मई (एजेंसी) मिस्री इस्लामी जिहाद के एक साबिक़ लीडर नबील नसिया अब्दुल फ़ताह ने आज दावा किया कि अलक़ायदा के सरबराह ओसामा बिन लादेन को अमेरीकी ख़ुसूसी फोर्सेस (सेल्स) ने ऑप्रेशन चीरो नीमो में गोली मार कर हलाक नहीं किया था बल्कि

क़ाहिरा, 29 मई (एजेंसी) मिस्री इस्लामी जिहाद के एक साबिक़ लीडर नबील नसिया अब्दुल फ़ताह ने आज दावा किया कि अलक़ायदा के सरबराह ओसामा बिन लादेन को अमेरीकी ख़ुसूसी फोर्सेस (सेल्स) ने ऑप्रेशन चीरो नीमो में गोली मार कर हलाक नहीं किया था बल्कि 2 मई 2011 को पाकिस्तानी शहर ऐबटाबाद में अमेरीकी फोर्सेस की खु़फ़ीया कार्रवाई के आग़ाज़ के फ़ौरी बाद ओसामा बिन लादेन ने गिरफ़्तारी से बचने के लिए अपने जिस्म से बांधे हुए बारूदी मवाद का धमाका करते हुए ख़ुद को उड़ा लिया था।

अब्दुल फ़ताह ने बिन लादेन की नाश को समुंद्र के सुपुर्द किए जाने की कहानी को भी मन घड़त क़रार दिया और कहा कि अमेरीकी सदर ने झूठ कहा जब ये दावा किया कि बिन लादेन की नाश समुंद्र के सुपुर्द की गई है। हालाँकि बिन लादेन की नाश बिलकुल उसी तरह टुकड़े टुकड़े हो गई थी जैसे धमाका करने वाले ख़ुदकुश बमबार की लाश की होती है।

ओसामा ने दानिस्ता तौर पर ये इसलिए किया था कि अमेरीकी फोर्सेस को उनकी शनाख़्त का कोई मौक़ा ही ना दिया जा सके। अब्दुल फ़ताह ने जो अगरचे 2 मई 2011 को एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन की हलाकत के लिए अमेरीकी फोर्सेस की ख़ुसूसी कार्रवाई के वक़्त वहां मौजूद नहीं थे, कहा कि बिन लादेन के एक क़रीबी रिश्तेदार से उन्हें ये तमाम तफ़सीलात मौसूल हुई हैं।

अब्दुलफ़ताह ने जो माज़ी में ओसामा के बॉडीगार्ड भी रहे हैं, तौसीक़ की कि ओसामा अपनी ज़िंदगी के आख़िरी 10 साल के दौरान हमेशा अपने जिस्म से धमाका ख़ेज़ मवाद बांध रखे थे और इस बात पर अमादा थे कि वो ख़ुद को अमेरीकीयों के हाथ लगने नहीं देंगे। अब्दुलफ़ताह ने मज़ीद कहा कि अमेरीकी इंटेलीजेंस सर्विस ने ओसामा को ज़िंदा पकड़ने का मंसूबा बनाया था जो महज़ उसकी ख़ामख़याली थी और ओसामा ने पकड़े जाने से बचने के लिए ख़ुद को धमाका से उड़ा लिया था।

वो (ओसामा) अपनी आख़िरी सांस तक कई अहम राज़ों को अपने सीना में छुपाए रखना चाहते थे। कई ख़लीजी ममालिक में उन के मुतअद्दिद स्पांसर्स थे जो उन्हें रक़ूमात भेजा करते थे और वो (ओसामा) चाहते थे कि उन्हें (स्पांसर्स को) मुश्किलात का सामना ना करना पड़े। अलक़ायदा लीडर ने तमाम राज़ों को आख़िरी सांस तक पोशीदा रखने के लिए ख़ाना काअबा में क़सम खाई थी।

अब्दुल फ़ताह ने ख़्याल ज़ाहिर किया कि मुम्किन है कि ओसामा के क़रीबी हामीयों ने उन्हें धोखा दिया है। बिन लादेन के रिहायशी कम्पाऊंड के क़रीब पहुँचना इंतिहाई दुशवार था। उनके शख़्सी मुहाफ़िज़ीन सिर्फ़ यमनी और सऊदी थे जिन्हें दुश्मन कभी ख़रीद नहीं सकते थे।

अब्दुलफ़ताह ने बयान किया कि अमेरीकी आख़िर किस तरह ओसामा तक पहूंच पाए और कहा कि एक पाकिस्तानी नज़ाद कुवैती शहरी का भाई ग्वांतानामो क़ैदख़ाना में था जिस के ओसामा बिन लादन से इंतिहाई क़रीबी ताल्लुक़ात थे। कुवैती शहरी 2008 में रिहाई के बाद अपने वतन वापस हुआ और अमेरीकी जासूसी इदारा सी आई ए ने कुवैती हुक्काम से कहा कि वो उस शख़्स को गिरफ़्तार ना करें और ना ही उसकी निशानदेही की जाये।

ये शख़्स अपने अफ़राद ख़ानदान से मुलाक़ात किया करता था और जाली पासपोर्ट पर अक्सर पाकिस्तान का सफ़र किया करता था और अमेरीकी इंटेलीजेंस के आफ़िसरान ना सिर्फ़ उसकी नक़ल-ओ-हरकत पर नज़र रखा करते थे बल्कि इसके टेलीफ़ोन भी रिकार्ड किए जाते थे ताकि इसके राबतों/ राबितों/ संपर्क का पता चलाया जा सके।

इस दौरान पता चला कि बिल उमूम वो मख़सूस मुक़ाम पर अपना मोबाईल फ़ोन बंद किया करता था। जिस के बाद अमेरीकीयों को इस के आगे की नक़ल-ओ-हरकत का पता नहीं चलता था। कई माह तक पाकिस्तानी नज़ाद कुवैती पर मुसलसल नज़र रखने के बावजूद अमेरीकी वहां बिन लादेन के घर का पता चलाने में नाकाम हो गए।

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