Tuesday , December 12 2017

बिहार असेम्बली इंतेख़ाबात, मजलिस पर बी जे पी की मदद का इल्ज़ाम

मुंबई: कांग्रेस ने बिहार इंतेख़ाबात में मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन ( ऐम आई ऐम ) के दाख़िला को दरअसल दोनों की शीराज़ा-बंदी की एक ऐसी कोशिश क़रार दिया है जिससे बी जे पी को मदद पहूंच सकती है। एम आई एम लीडर असदुद्दीन ओवैसी ने हफ़्ते को ऐलान किया कि उनकी पार्टी बिहार असेम्बली इंतेख़ाबात में हिस्सा लेगी लेकिन ख़ुद को इलाक़ा सीमांचल तक महदूद रखेगी जो चार अज़ला अरडीहा, पूर्णिया, किशनगंज और कठियार पर मुश्तमिल है।

इस इलाक़े के 40असेम्बली हलक़ों में काबुल लिहाज़ मुस्लिम ववटस हैं जिन्हें जे डी ( यू ) आर जे डी और कांग्रेस पर मुश्तमिल अज़ीम सेकूलर इत्तेहाद से छीनने के लिए मजलिस कोशिश करेगी। मुंबई कांग्रेस कमेटी के सदर संजय नरोपम ने कहा कि मजलिस को मुसल‌मानों से कोई दिलचस्पी और तअल्लुक़-ए-ख़ातिर नहीं है।

नरोपम ने कहा कि सीमांचल में बी जे पी का कोई वजूद नहीं है लेकिन ये पार्टी वहां बेहतर मुज़ाहरा करने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रही है। चुनांचे एम आई एम वहां मुस्लिम वोटस हासिल करने की कोशिश करेगी और चंद नशिस्तों पर कामयाबी के लिए बी जे पी को मदद करेगी।

सीनियर कांग्रेस लीडर ने सवाल किया कि अगर मजलिस को वाक़ई मुस्लिम नुमाइंदगी से दिलचस्पी है तो वो बिहार के दीगर हलक़ों से मुक़ाबला क्यों नहीं कर रही है। ताहम एम आई एम क़ाइदीन ने वोटों की शीराज़ा-बंदी के इक़दाम को मुस्तरद‌ कर दिया और कहा कि ये नाम निहाद सेकूलर जमातों की ज़हनी इख़तिरा है।

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