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बिहार के सभी जिलों में 1765 पदों पर उर्दू कर्मचारियों के नियुक्ति की मांग, उर्दू निदाशालय ने कहा- कार्रवाई जारी

पटना: बिहार में 1765 उर्दू कर्मचारी की बहाली की जाएगी। इस बात की घोषणा पिछले एक साल पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से किया गया था, लेकिन इस संबंध में अब तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है.

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न्यूज़ नेटवर्क समूह न्यूज़ 18 के मुताबिक उर्दू निदेशालय और उर्दू सलाहकार समिति ने सरकार से मांग की है कि उर्दू कर्मचारियों की नियुक्ति जल्द प्रक्रिया में लाई जाए। उर्दू वाले इस मामले में सरकार से बार-बार मांग कर चुके हैं, लेकिन उर्दू कर्मचारियों की बहाली के संबंध में अभी तक गंभीर प्रयास नहीं किए जा सके हैं। रिपोर्टों के अनुसार उर्दू स्टाफ की बहाली हो जाएगी, तो कानून उर्दू के कार्यान्वयन का रास्ता भी आसान हो जाएगा।

गौरतलब है कि बिहार में उर्दू को दूसरी सरकारी भाषा का दर्जा प्राप्त है। इस आधार पर उर्दू कानून लागू करने के लिए सरकार के सभी क्षेत्रों में उर्दू के कर्मचारियों की नियुक्ति की जानी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के सभी कार्यालयों, विभागों, रजिस्ट्री कार्यालय, थानों, निगमों, समितियों और आयोगों में उर्दू स्टाफ बहाल करने की घोषणा की थी। उर्दू डायरकटोरेट के डायरेक्टर ने बताया इस संबंध में सरकार कार्रवाई कर रही है।

राज्य भर में 1765 उर्दू कर्मचारी की बहाली की जानी है। इस मामले की फाइल वित्त विभाग में पड़ी है। उर्दू निदेशालय के अनुसार सरकार की ओर से पहले चरण में 495 पदों पर बहाली की जाएगी। उधर उर्दू सलाहकार समिति बिहार ने मुख्यमंत्री को सलाह दी है कि सभी पदों पर जल्द बहाली प्रक्रिया सुनिश्चित किया जाये।

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