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बिहार को मिलेगा पसमांदा रियासत का दर्जा

नई दिल्ली, 27 मार्च: बिहार को मरकज़ी हुकूमत पसमांदा रियासत का दर्जा दे सकती है। यूपीए हुकूमत ने 2014 के इलेक्शन के पहले ट्रंप (TRUMP) का पत्ता फेंका है। उसने एक तीर से कई निशाने साधे हैं, जहां एक तरफ उसने बिहार के वज़ीर ए आला नीतीश कुमार को लुभ

नई दिल्ली, 27 मार्च: बिहार को मरकज़ी हुकूमत पसमांदा रियासत का दर्जा दे सकती है। यूपीए हुकूमत ने 2014 के इलेक्शन के पहले ट्रंप (TRUMP) का पत्ता फेंका है। उसने एक तीर से कई निशाने साधे हैं, जहां एक तरफ उसने बिहार के वज़ीर ए आला नीतीश कुमार को लुभाने की कोशिश की है वहीं उसने ममता बनर्जी और नवीन पटनायक को भी खुश करने की चाल चली है।

अग्रेजी रोज़नामा टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक म्रकज़ी हुकूमत 2014 को होने वाले आम इलेक्शन के पहले बिहार को पसमांदा रियासत का दर्जा देने का ऐलान कर सकती है। इससे बिहार को 6 से 7 हजार करोड़ का फायदा होगा। इसके साथ ही राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, मगरिबी बंगाल और ओड़ीसा के कुछ इलाकों को भी पसमांदा तबका की हुदूद/हद में लिया जाएगा।

नीतीश कुमार के बिहार को खास रियासत का दर्जा देने की मांग को लेकर हुकूमत ने यह कदम उठाया है। उन्होंने 17 मार्च को नई दिल्ली में अधिकार रैली मुनाकिद कर बिहार को खास रियासत का दर्जा देने की मांग की थी।

इलेक्शन के पहले मरकज़ी हुकूमत पसमांदा रियासत की शर्तों में बदलाव करके बिहार में नीतीश कुमार, मगरिबी बंगाल में ममता, ओड़ीसा में नवीन पटनायक को खुश कर सकती है। दूसरी ओर ऐसा करके वह छत्तीसगढ़, राजस्थान और केरल में अपनी हालात मजबूत कर सकती है।

पसमांदा रियासत की शर्तों में बदलाव करके मज़कूरा रियासतों के कुछ इलाकों को पसमांदा तबका के मंसूबे का फायदा मिलने लगेगा। इससे पसमांदा तबका का वोट उसके खाते में चला जाएगा।

हुकूमत ऐसा करके एनडीए को कमजोर कर अगले इलेक्शन में फतह हासिल करने का मकसद बनाएगी। अगर नीतीश कुमार यूपीए के साथ नहीं भी रहते हैं तो एनएडीए के साथ नहीं रहकर भी यूपीए को फायदा पहुंचा सकते हैं।

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