Wednesday , December 13 2017

बिहार : नॉन बैंकिंग कंपनियों पर लगाम की तैयारी

नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनियों (एनबीएफसी) की तरफ से पैसे लेकर भागने की बढ़ती वारदात को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक ने संजीदा रुख एख्तियार किया है। अब एनबीएफसी को आरबीआइ के दस्तूरुल अमल का हर हाल में पालन करना जरूरी होगा।

नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनियों (एनबीएफसी) की तरफ से पैसे लेकर भागने की बढ़ती वारदात को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक ने संजीदा रुख एख्तियार किया है। अब एनबीएफसी को आरबीआइ के दस्तूरुल अमल का हर हाल में पालन करना जरूरी होगा।

अगर कोई एनबीएफसी अपने मैनेजमेंट में किसी भी क़िस्म की बदलाव करती है, तो उसे पहले आरबीआइ से मंजूरी लेना लाज़मी होगा। अगर वह बिना बताये मैनेजमेंट में बदलाव करती है और जांच में पकड़ी जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। ज़रूरत पड़ने पर ऐसी कंपनियों को बंद भी किया जा सकता है।

क्राइटेरिया की जांच होगी

आरबीआइ के अफसरों के मुताबिक एनबीएफसी में जो भी डाइरेक्टर होंगे, उनका क्राइटेरिया देखा जायेगा। इसमें यह देखा जायेगा कि वह किसी डिफॉल्टिंग कंपनी में काम न कर रहा हो। उस पर कोई इन्क्वायरी न चल रहा हो, बैंक करप्ट न हो।

आरबीआई के मुक़ामी डाइरेक्टर, मनोज वर्मा ने बताया कि कंपनी के मैनेजमेंट में बदलाव करने पर भारतीय रिजर्व बैंक की इजाजत लाज़मी होगी। तमाम एनबीएफसी को इस दस्तूरुल अमल का पालन करना जरूरी होगा।

क्यों ऐसा किया गया

एनबीएफसी पहले बिना बताये ही अपने मैनेजमेंट में बदलाव कर देती थी। फिर कुछ वारदात होने पर जानकारी मिलती थी कि मुतल्लिक़ सख्श पता ही नहीं चल रहा है। अब उस कंपनी के मैनेजमेंट को कोई दूसरा सख्श देख रहा है। फिर चाह कर भी कुछ कार्रवाई नहीं हो पाती थी।

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