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बिहार : नोटबंदी के बाद आयकर विभाग की अबतक 130 छापेमारी

इसके अलावा आयकर विभाग की तरफ से ब्लैकमनी वालों के लिए चलायी गयी स्वघोषित आय या आइटीडीएस (इनकम टैक्स डिक्लेरेशन स्कीम) के अंतर्गत लोगों ने स्वेच्छा अपने दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा सरेंडर किये या इनकी घोषणा की. स्वेच्छा से घोषित की गयी इन ब्लैक मनी पर 45 फीसदी की पेनाल्टी लेकर इसे टैक्स छाते के दायरे में लेकर आया गया. हालांकि जनवरी से मार्च 2016 के बीच चलाये गये ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाय)’ के तहत ब्लैक मनी के रूप में महज 100 करोड़ रुपये ही सामने आ पाये. इस योजना के जरिये लोगों को अंतिम मौका दिया गया था कि अपने पास जमा ब्लैक मनी को घोषित कर दें.  अब नये प्रावधान के तहत कोई ब्लैक मनी वाला पकड़ा जाता है, तो उससे 137 फीसदी जुर्माना वसूला जायेगा. मामला गंभीर होने पर जेल भी जाना पड़ सकता है. नोटबंदी के बाद आयकर की रडार पर आये दो हजार  बैंक में अभी भी आधे खातों की जांच जारी है. जांच में गड़बड़ी पाये जाने पर व्यापक स्तर पर फिर से छापेमारी शुरू करने की तैयारी चल रही है.
दो हजार संदिग्ध खातों में 50 फीसदी की जांच पूरी
नोटबंदी के बाद राज्य में दो हजार ऐसे बैंक एकाउंट सामने आये थे, जिनमें एक करोड़ से ज्यादा रुपये जमा किये गये थे. इनमें 50 फीसदी बैंक खातों की जांच पूरी कर ली गयी है.
इनमें पड़े 50 करोड़ रुपये को जब्त करने के अलावा छापेमारी की भी कार्रवाई की गयी है. इसी क्रम में बिहार कुछ बड़े घोटाले सामने आये. सबसे प्रमुख था, गया का मोती पटवा केस, जिसमें करीब 70 फर्जी एकाउंट के माध्यम से 60 करोड़ों रुपये ब्लैक से व्हाइट किये गये थे. जांच जब शुरू हुई, तो इसका लिंक नयी दिल्ली के हवाला कारोबारियों से लेकर मुंबई समेत अन्य शहरों से भी जुड़े. फिलहाल इस मामले की जांच इडी को सौंपी गयी है.
जांच पूरी होने के बाद एक बड़े रैकेट के खुलासे की संभावना है. इसके बाद पटना में राजद के एमएलसी रहे अनवर अहमद का अवामी सहकारिता बैंक का मामला है. इसमें भी करीब 50 फर्जी बैंक खातों को खोलकर 45 करोड़ से ज्यादा रुपये को ब्लैक से व्हाइट कर दिया गया था. इसमें कई नेताओं के रुपये भी हैं. इस मामले की जांच सीबीआइ कर रही है.
जन-धन के 689 खातों में दो लाख से ज्यादा हुए थे जमा
नोटबंदी के बाद ब्लैक मनी को व्हाइट करने के खेल में बड़े स्तर पर जन-धन खातों का उपयोग किया गया था. ऐसे 689 संदिग्ध जन-धन खाते सामने आये थे, जिनमें दो लाख से ज्यादा रुपये अचानक जमा कर दिये गये थे.
इसमें बड़ी संख्या में ऐसे खाते थे, जिनमें खुलने के बाद से एक रुपये जमा नहीं हुए थे. ऐसे खाता धारकों से पूछताछ चल रही है कि ये रुपये आये कहां से. इस दौरान अब तक करीब 300 वैसे बैंक खाते सीज किये जा चुके हैं, जिनमें जमा रुपये का खाता धारक हिसाब नहीं दे पाये हैं. बचे हुए शेष खातों की जांच चल रही है.
नोटबंदी के बाद आइटी की रडार पर आये दो हजार संदिग्ध खातों में बचे हुए करीब आधा खातों की जांच जारी है. इन खातों में जमा हुए एक करोड़ से ज्यादा रुपये की जांच चल रही है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब तक दर्जनों खाताधारकों से पूछताछ हो चुकी है. पूरी तहकीकात के बाद आयकर विभाग फिर बड़े स्तर पर ऐसे आरोपी लोगों के खिलाफ छापेमारी अभियान चलाने की तैयारी में है. पहले ऐसे तमाम बड़े संदिग्ध खातों की पहचान कर उनमें शामिल लोगों की सूची तैयार की जा रही है. इसके बाद फिर से व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरू की जायेगी.
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