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बिहार: पंचायती राज को मजबूत बनाने के लिए एक और कदम, सरपंचों को फैसला करने का मिला अधिकार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पंचायती राज को और मजबूत करने की दिशा में कई बड़े फैसले लिए है. उन्होंने बिहार के सरपंचो और उपसरपंचो को संबोधित करते हुए कहा कि थानेदार गांव के छोट-छोटे मामलों को ग्राम कचहरी के हवाले करें. उन्होंने कहा कि जो भी मामले ग्राम कचहरी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, केस दर्ज किए जाते हैं या कोर्ट के पास लंबित है, उन सारे मामलों को ग्राम कचहरी को ट्रांसफर करें.

सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, “पुलिस अधीक्षकों को उन मामलों को हस्तांतरित करने का निर्देश दिया जाएगा जो ग्राम कहचरियों के क्षेत्राधिकार में आते हैं और स्थानीय थानों को ऐसे मामलों के समाधान में सहायता पहुंचाने का निर्देश देने को कहा जाएगा.” यहीं नहीं कुमार ने कहा, “कानूनी मुद्दों पर सरपंचों एवं उपसरपंचों की सहायता के लिए न्यायमित्र नियुक्त किए गए हैं. ऐसे मामलों के त्वरित निस्तारण के अलावा थानों पर बोझ भी कम करेगा.”
सरपंचो को इन मुद्दों और धाराओं में कार्रवाई और सुनवाई करने का अधिकार है.

धारा 140: गैर फौजी अगर किसी फ़ौज का पोशाक पहना है तो.

धारा 142-143: जानबूझ कर गैर क़ानूनी सभा में भाग लिया हो तो

धारा 147: गैर क़ानूनी सभा द्वारा किसी ने हंगामा खड़ा किया हो तो

धारा 153: लोगों को भड़काने पर

धारा 160: सार्वजानिक जगहों पर लड़ाई कर अशांति फैलाना

धारा 285-286: ज्वलनशील पदार्थ का उपयोग लापरवाही से करना

धारा 290: उपद्रव करने पर

धारा 294: अश्लील हरकत, अपशब्द

धारा 356: संपति चोरी करने पर

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