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बिहार: मस्जिद तक पहुंचने वाले रास्ते को खुद मुसलमानों ने ही काट दिए!

चकिया। मस्जिद नमाज़ अदा करने की जगह होती है। मुसलमान उस मस्जिद में जाकर पांच वक्त की नमाज़ अदा करते हैं। पुरी दुनिया में जहां मुसलमान खुद को उभारने और आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है, वही बिहार के मोतिहारी जिले का एक गांव के कुछ मुसलमान मस्जिद जाने वाले रास्ते को ही काट दिया है।

कथित तौर पर इस गांव के बने मस्जिद तक जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। जो कुछ भी है, बस खेतों की पगडंडी है। इस गांव के नमाज़ी इन्ही पगडंडीयों के सहारे मस्जिद तक का रास्ता तय करते हैं। करीब छह साल पहले बनी इस मस्जिद का निर्माण अभी भी बाकी है।

हैरानी की बात यह है कि जहां एक भाई मस्जिद बनने के लिए अपनी जमीन वक्फ़ करता है वहीं दुसरे भाई ने मस्जिद तक जाने वाले रास्ते को काटकर पतला बना देता है।

मामला कुछ महिने पहले का है, जब मस्जिद की घेराबंदी के लिए दीवार उठाई जा रही थी तो मस्जिद से सटे उनके जमीन को लेकर विवाद हो गया। इसी कड़ी को जोड़ते हुए एक शख्स ने मस्जिद तक जोड़ने वाले एक पगडंडी से लगे अपने जमीन पर गहरा बांध खोद दिया।

इस हरकत की वजह से मस्जिद तक जाने वाली पगडंडी बिल्कुल पतली हो गई और नमाज़ पढ़ने के लिए जाने वाले लोगों को दिक्कतें पेश होने लगी।

कुछ महीनों बाद पास वाले जमीन के मालिक ने भी यह कहकर वैसा ही बांध बना दिया कि अगर हम नहीं ऐसा करेंगे तो हमारी जमीन की तरफ़ बांध धस जायेगा और पगडंडी कमजोर होकर हमारी जमीन में चली आयेगी।

इस हरकत को देखकर कुछ दिनों बाद एक और शख्स ने भी अपनी जमीन से लगी पगडंडी के पास गहरा बांध खोद डाला। अब हालत ये है कि मस्जिद तक जाने के रास्ते तक नहीं रहे।

नमाज़ पढ़ने जाने वाले सभी व्यक्तियों ने किसी से कभी शिकायत नहीं करके एक मिसाल पैदा किया और आजतक वे शिकायत नहीं किए।

यह मामला बिहार के मोतिहारी जिले के कल्याणपुर ब्लॉक स्थित भुवन छपरा गांव की है। इस गांव में करीब 70 – 80 घर मुसलमानों की आबादी है। इस मुहल्ले में बनी मस्जिद का नाम ‘नूरी मस्जिद’ है। इस गांव में रह रहे मुसलमानों में तालीम की बहुत बड़ी कमी है।

अगर रोजगार की बात की जाए तो लगभग ज्यादातर आबादी मजदूरी करके खाने वालों की है। नौकरी पेशा लोगों की बात की जाए तो सरकारी और प्राइवेट नौकरीयों में इनकी संख्या बिलकुल नहीं के बराबर हैं।

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