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बिहार में शराब बंदी से झारखंड में बढ़ी शराब की खपत, रेवन्यू हुआ 10 गुणा ज्यादा

रांची : झारखंड के अलग रियासत बनने के बाद यहां शराब से हासिल होने वाले रेवन्यू में लगभग 10 गुणा की इजाफा हुई है। माली साल  2001-02 में जहां 101.98 करोड़ का रेवन्यू मिला था, साल 2015-16 में सरकार को तकरीबन 940 करोड़ का रेवन्यू हासिल हुआ है। शराब की खपत में भी चार गुणा की इजाफा हुई है। इसके पीछे के वजुहात में पड़ोसी रियासत बिहार में मुकम्मिल शराब बंदी मानी जा रही है। 

बिहार में शराब बंदी का असर झारखंड में दिख रहा है। उत्पाद विभाग के अफसर बताते हैं कि बिहार के बॉर्डर के जिले के लोग शराब पीने के लिए झारखंड में आ रहे हैं। वीवरेज कॉरपोरेशन के तशकील के बाद से सरकार को हर साल 100 करोड़ की इजाफी इन्कम हो रही है क्योंकि शराब की थोक सप्लाय का काम वीवरेज कॉरपोरेशन करने लगा है। इसमें 75 फीसदी मार्जिन मनी से और 25 फीसदी ग्रोथ से।  अहम मुद्दा यह है कि झारखंड में शराब बंदी की सिम्त में अब तक सरकार के सतर पर कोई कोशिश शुरू नहीं हुआ है। किसी तरह की पॉलिसी या बनाने का कोई इशारा नहीं है।

पूर्ण शराब बंदी लागू होने के बाद बिहार सरकार ने झारखंड सरकार से मदद के लिए लेटर लिखा था। उसमें उसने बॉर्डर के जिलों में शराब की स्मगलिंग और आवाजाही पर रोक लगाने में मदद की दरख्वास्त किया था। इसके बाद झारखंड सरकार ने बॉर्डर के जिलों के एसपी-डीसी को लेटर लिख कर शराब के गैर कानुनी कारोबार पर रोक लगाने की हिदायत दिया है। अफसरों का कहना है कि मौजूदा माली साल के खत्म होने के बाद ही यह जाहिर हो सकेगा शराब की खपत में तकरीबन कितने फीसद की इजाफा हुई है।

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