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बिहार में सरकारी कर्मचारी अगर नशा करते पकड़े गए तो जायेगी नौकरी

पटना। बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून के दायरे को सरकारी कर्मियों के लिए ज्यादा विस्तृत और सख्त कर दिया गया है। अब किसी तरह के मादक या नशीले पदार्थ का सेवन करते पकड़े जाने पर न्यायिक सेवा समेत राज्य सरकार में तैनात सभी स्तर के कर्मियों पर विभागीय कार्रवाई की जायेगी।

इससे संबंधित प्रस्ताव पर बुधवार को कैबिनेट की हुई बैठक में मुहर लगा दी गयी। बैठक में 40 एजेंडों को लाया गया, जिनमें 36 मंजूर हुए। बैठक के बाद कैबिनेट विभाग के प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने कहा कि बिहार जुडिशियल ऑफिसर्स कंडक्ट रूल्स, 2017 और बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 में अहम संशोधन किये गये हैं।

अब बिहार न्यायिक सेवा समेत सभी स्तर के सरकारी कर्मियों के सर्विस कोड (सेवा नियमावली) में यह प्रावधान कर दिया गया है कि राज्य की सीमा में अगर किसी स्तर के कर्मी किसी तरह के मादक या नशीले पेय, औषधि, पदार्थ, ड्रग्स या अन्य सामग्री का सेवन करते पकड़े गये, तो उन पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जायेगी।

किसी सार्वजनिक या अन्य किसी स्थान पर किसी तरह के मादक पेय के सेवन को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। राज्य सरकार के अधीन कार्यरत सभी स्तर के न्यायिक अधिकारियों पर भी यह नियम समान रूप से लागू होगा।

गौरतलब है कि राज्य में पांच अप्रैल, 2016 से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है, जिसके अंतर्गत राज्य के सभी सरकारी कर्मी और नागरिक आते हैं। इसमें सजा के जो प्रावधान हैं, वे सभी पर समान रूप से लागू हैं। लेकिन सरकारी कर्मियों के लिए यह नया प्रावधान किया गया है, जिसमें शराबबंदी कानून में निर्धारित सजाओं के अलावा उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी चलायी जायेगी। अगर कोई सरकारी कर्मी इस तरह के किसी अपराध में पाये गये, तो उन्हें अतिरिक्त रूप से विभागीय कार्रवाई से भी गुजरना पड़ेगा।

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