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बीएमसी के चुनाव परिणामो से ‘भाषाई ध्रुवीकरण’ का पता चलता है

‘ध्रुवीकरण’ शब्द को ज्यादातर दक्षिणपंथी – धर्म केंद्रित राजनीति के साथ जोड़ा जाता है, परंतु ‘बृहन्मुंबई नगर निगम’ के चुनावों के परिणाम से दो दक्षिणपंथी दलों, शिवसेना और भाजपा के बीच भाषा के तर्ज पर हुए ध्रुवीकरण के बारे में पता चलता है।

सेना और भाजपा, महाराष्ट्र के दो राजनितिक साथियो ने नगर पालिका के चुनाव अलग – अलग लड़े । वोटिंग के नमूनों से यह पता चलता है की इन चुनावो मे मतदाता दोनों पार्टियों के बीच क्षेत्रीय या भाषाई तरीके से बंट गए थे, भाजपा के एक नेता ने कहा।

भाजपा के मीडिया सेल के सह-संयोजक सौमेन मुखर्जी ने कहा की “निम्न मध्यम वर्ग और मराठी बोलने वालों के बीच श्रमिक वर्ग ने काफी हद तक शिवसेना के लिए मतदान किया, जबकि ऊपरी मध्यम वर्ग, गुजराती भाषी और उत्तर भारतीयों की बड़ी संख्या ने  भाजपा को वोट दिया है”।

“अब धुर्वीकरण भाषा के आधार पर हो रहा है । गैर-मराठी भाषी मतदाताओं ने काफी हद तक भाजपा को ही वोट दिया है । दूसरी ओर पुराने शहर के क्षेत्रों में पिछले कई वर्षों से विकसित पार्टी कार्यकर्ताओं के मजबूत नेटवर्क की कारण शिवसेना को ही ज़्यादा वोट मिले हैं,” मुखर्जी ने पीटीआई को बताया।

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