बीजेपी के शासन में दलित, पिछड़ा और मुस्लिमों की आजादी खतरे में है- मायावती

बीजेपी के शासन में दलित, पिछड़ा और मुस्लिमों की आजादी खतरे में है- मायावती

बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष और यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) पर जमकर हमला किया है। मायावती ने कहा कि संघ ने भारतीय जनता पार्टी सरकार की विफलताओं और भ्रष्टाचार से ध्यान बांटने के लिए ‘भविष्य का भारत : आरएसएस का दृष्टिकोण’ व्याख्यान समारोह का आयोजन हुआ।

उन्होंने कहा कि संघ और बीजेपी की सोच दलित, पिछड़ा वर्ग तथा मुस्लिम विरोधी है और उसके शासन में इन वर्गों की आजादी खतरे में पड़ गयी है। आरएसएस भी बीजेपी के विरुद्ध बने माहौल से चिंतित है।

गुरुवार को मायावती ने राजधानी दिल्ली में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन के ऐलान किया। इसी दौरान उन्होंने कहा कि आरएसएस ने बीजेपी की जीत के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया है, लेकिन पूरा देश जानता है कि आरएसएस दलित, पिछड़ा और मुस्लिम विरोधी है।

उसके शासन में इन वर्गों के लोगों का मजहब, जान माल और जीने की आजादी खतरे में है। बसपा प्रमुख ने कहा कि आरएसएस का यह कहना गलत है कि अगर मुसलमान खुद जन्मभूमि पर मंदिर बनवाते हैं तो बरसों से उन पर उठ रही अंगुलियां खुद ही झुक जाएंगी। इसी वजह से उसने संवाद कार्यक्रम आयोजित कर ध्यान बांटने का प्रयास किया है।

बता दें कि व्याख्यान समारोह के अंतिम दिन प्रश्नोत्तर सत्र में भागवत ने कहा कि भगवान राम भारत राष्ट्र के बहुसंख्य लोगों के लिए भगवान हैं लेकिन वे सिर्फ भगवान नहीं है।

लोग उनको इमाम-ए हिंद मानते हैं। इसलिए मैं चाहूंगा कि जिस स्थान पर राम जन्मभूमि है उसी जगह भव्य राम मंदिर बने। भागवत ने कहा कि अगर ऐसा हो गया कि हिंदू और मुस्लिमों के बीच झगड़े का एक बड़ा कारण खत्म हो जाएगा। यह काम अगर सद्भावना से हुआ तो मुस्लिमों की ओर उठने वाली अंगुलियों में बड़ी कमी आएगी।

बसपा प्रमुख ने मोहन भागवत के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि संघ संविधान की मूल भावना का सम्मान करता है। हमारे खिलाफ संविधान के विरोध का एक भी मामला नहीं है। इसपर माया ने कहा कि संघ मूलत: संविधान विरोधी है और उसके तथा मुसलमानों के बीच रिश्ते सुधर नहीं सकते हैं।

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