Wednesday , April 25 2018

बीजेपी जरूर गुजरात जीता, पर कांग्रेस हारा नहीं

नई दिल्ली : बीजेपी लगातार 22 साल के बाद एक बार फिर गुजरात में सरकार बनाने जा रही है और पश्चिम बंगाल में जो वामपंथियों का रिकॉर्ड था, उसकी बराबरी करने जा रही है. नतीजों के मुताबिक़ 2019 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी फ़्रंट रनर है, लेकिन 2014 के मुक़ाबले कांग्रेस ज़्यादा सशक्त विपक्ष बनने की ओर बढ़ रही है.

2019 में शायद एक बार फिर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनेंगे लेकिन 282 सीटों के साथ नहीं. और एक बार फिर कांग्रेस विपक्ष में होगी लेकिन इस बार विपक्षी दल की हैसियत के साथ. 44 नहीं शायद तीन अंक के आंकड़े के साथ हो तो एक दिलचस्प राजनीति की संभावना है.

अगर इस चुनाव को आप बीजेपी के नज़रिए से देखेंगे तो पाएंगे कि उनकी सीटें अंतिम नतीजे आने तक जो भी रही हों, लेकिन वोट शेयर उनका 48 प्रतिशत से थोड़ा कम था. मतलब सवा प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई.

वे कह सकते हैं कि इतनी विरोधी लहर के बावजूद उनका वोट शेयर बढ़ा है. लेकिन वो ये नहीं कहेंगे कि 150 सीट का दावा करने वाले अमित शाह और नरेंद्र मोदी की जोड़ी को चुनाव जितवाने में पसीना आ गया और वह 99 सीटों तक सिमट गए.

कांग्रेस की वापसी शुरू नहीं हुई है लेकिन कांग्रेस की जो लुटिया डूबी हुई थी वो थोड़ी उबरती हुई दिखी है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार होने की संभावना बढ़ी है.कांग्रेस के मुताबिक़, बीजेपी के नेता इतने परेशान हो गए कि देश के प्रधानमंत्री को जनसभा में पूर्व प्रधानमंत्री को देशद्रोही कहना पड़ा. वैसे भारत के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ.

इस चुनाव में प्रचार का स्तर बीजेपी ने ज़्यादा गिराया न कि कांग्रेस ने. कांग्रेस ने जातीय राजनीति की और जातीय राजनीति तो इस देश के कण-कण में समाई हुई है. लेकिन प्रचार का स्तर प्रधानमंत्री ने गिराया.

अगर कोई और नेता बीजेपी में इस तरह की अनर्गल बात कहता तो इतनी बात नहीं होती, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अहमद पटेल को पाकिस्तानी लोग मुख्यमंत्री बनाने की कोशिश कर रहे हैं. मतलब इरादा साफ़ तौर पर हिंदू-मुस्लिम में धुव्रीकरण कराने का था. मोदी का बयान थोड़ा सा ग़ैर-ज़िम्मेदाराना था जो कि आने वाले दिनों की राजनीति के लिए अच्छा आगाज़ नहीं है.

लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की पॉलिटिक्स साफ़ तौर पर ये है कि देश को कैसे आगे बढ़ाना है, किस दिशा में बढ़ाना है. और वह सोचते हैं कि यह तभी संभव होगा जब वह चुनाव जीतेंगे. इसलिए चुनाव जीतने के लिए वो कुछ भी कर सकते हैं.

इस चुनाव के नतीजे बताते हैं कि वह मज़बूत विपक्ष की ओर बढ़ रहा है और जो एकछत्र राज मोदी और बीजेपी का था उसमें कुछ कमी होगी. यह लोकतंत्र के लिए अच्छा होगा. बीजेपी ने जिस मुक्ति का नारा दिया था, वह पूरा होता तो कांग्रेस को 42 फ़ीसदी वोट कैसे मिल जाते? यह ज़ुमलेबाज़ी से ज़्यादा कुछ नहीं लगता.

2024 में राहुल गांधी 54 साल के होंगे और मोदी लगभग 74 के होंगे इसलिए उनका समय 2024 के बाद शुरू होगा. लेकिन फिर भी उनकी राह मुश्किल है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रणनीति के तौर पर इस समय सबसे सफल नेता हैं. लेकिन असंभव कुछ भी नहीं है और यह परिदृश्य बदल भी सकता है.

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