बीजेपी व आरएसएस ना तो अपने देश के भारतीय संविधान में और ना ही इसमें निहित लोकतान्त्रिक मूल्यों में भी विश्वास रखता है: मायावती

बीजेपी व आरएसएस ना तो अपने देश के भारतीय संविधान में और ना ही इसमें निहित लोकतान्त्रिक मूल्यों में भी विश्वास रखता है: मायावती
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नई दिल्ली: अपने देश की आज़ादी के बाद से हमें ज्यादातर यह देखने के लिये मिल रहा है कि केन्द्र में जिस भी पार्टी की सरकार होती है तो फिर उनके द्वारा राज्यों में नियुक्त किये गये माननीय राज्यपाल, अधिकांश उन्हीं के हिसाब से ही अपने फैसले लेते हैं जो यह सब माननीय राज्यपालों की गरिमा को खत्म करने के साथ-साथ, अपने देश के लोकतन्त्र के लिये भी ठीक नहीं हो रहा है और इसकी आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े प्रदेश अर्थात उत्तर प्रदेश में हमारी पार्टी भी कई बार शिकार हुई है जिसकी वजह से हमें न्याय के लिये माननीय सुप्रीम कोर्ट तक में भी जाना पड़ा है।

इतना ही नहीं बल्कि कल और आज जो कुछ भी हमें कर्नाटक स्टेट में विधानसभा के आये नतीजों के बाद से देखने के लिये मिला है और इसके पूर्व में गोवा, मणिपुर व मेघालय आदि में भी जो कुछ हमें देखने के लिये मिला है तो यह सब बीजेपी व इनके खास संगठन आर.एस.एस. द्वारा बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के बनाये गये भारतीय संविधान को कमजोर करने की व इसे खत्म करने की भी इनकी यह बहुत बड़ी साजिश रची जा रही है।

इस सन्दर्भ में यहाँ मैं यह भी कहना चाहूँगी कि जबसे केन्द्र में ख़ासकर बीजेपी के नेतृत्व में एन.डी.ए. की सरकार बनी है तबसे इन्होंने हर स्तर पर अपनी सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग करके यहाँ लोकतान्त्रिक मूल्यों की काफी हद तक हत्या की है जिसके अनेकों उदाहरण देश की जनता के सामने हैं और इस मामले में ताजा-ताजा उदाहरण कर्नाटक स्टेट का है जहाँ बीजेपी ने यहाँ विधानसभा के आये नतीजों के बाद, कांग्रेस, जे.डी.-एस. व बीएसपी के कुल विधायकों की संख्या से काफी दूर रहते हुये भी आज येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री के पद की शपथ दिलवा दी है जो अति-निन्दनीय है।

लेकिन इससे यह बात भी पूरे साफ तौर से स्पष्ट हो जाती है कि बीजेपी व इनका आर.एस.एस. संगठन ना तो अपने देश के भारतीय संविधान में और ना ही इसमें निहित लोकतान्त्रिक मूल्यों में भी विश्वास रखता है जो केन्द्र व राज्यों में इनके सत्ता में रहते हुये अपने देश की जनता के उज्जवल भविष्य के लिये कोई शुभ संकेत नहीं हैं। ऐसे वर्तमान हालात में अब हमारी पार्टी माननीय सुप्रीम कोर्ट से ही यह विशेष आग्रह करती है कि वह अपने देश के संविधान को व इसमें निहित लोकतान्त्रिक मूल्यों को बचाने में अपनी अहम् भूमिका निभाये।

इसके साथ-साथ, यहाँ मैं कांग्रेस पार्टी को भी यह सलाह देना चाहती हूँ कि इनको भी कर्नाटक स्टेट में विधानसभा के हुये आमचुनाव मंे अपने राजनैतिक लाभ के लिये आगे भविष्य में किसी भी चुनाव में अपनी चुनावी जनसभाओं में ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिये जिससे उल्टे बीजेपी व आर.एस.एस. को ही फायदा पहुँच जाये और इस सम्बन्ध में जैसाकि यह विदित है कि इन्होंने इस चुनाव में अपने भाषणों में ख़ासकर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में जे.डी.-एस. को बीजेपी की ’’बी’’ टीम बताकर इनके वोटों को और बांट दिया, जिसकी वजह से ऐसे क्षेत्रों में भी यहाँ अधिकांश बीजेपी के उम्मीदवार ही कामयाब हो गये और यदि कांग्रेस पार्टी ने ऐसा नहीं किया होता तो फिर इस चुनाव में बीजेपी के विधायकों की संख्या 104 भी नहीं होती बल्कि इससे काफी नीचे चली जाती।

लेकिन फिर भी ऐसे वातावरण में बीएसपी के लोगों ने यहाँ अपनी पार्टी का एक विधायक बनाया है और इसके साथ-साथ अपने गठबन्धन दल अर्थात जे.डी.-एस. के उम्मीदवारों को भी काफी कुछ अपना वोट ट्रांसफर करवाया तो उसके लिये मैं उन सभी का अपने केन्द्रीय यूनिट की ओर से पूरे तहेदिल से आभार भी प्रकट करती हूँ। खासकर जहाँ-जहाँ मेरी चुनावी जनसभा हुई वहाँ के लोगों ने मेरी अपील पर पूरा ध्यान दिया और जनता दल-एस व बी.एस.पी. गठबंधन के उम्मीदवारों को जिताया और इसके लिये मैं खासकर दलित समाज के लोगों का तहेदिल से शुक्रिया अदा करती हूँ।

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार व बीजेपी द्वारा बार-बार सत्ता का दुरूपयोग व साम, दाम, दण्ड, भेद आदि अनेकों प्रकार के हथकण्डों को अपनाये जाने से देश के संविधान व लोकतंत्र को जो गंभीर खतरा पैदा हो गया है उसका फौरी समाधान केवल माननीय न्यायालय ही निकाल सकता है, ऐसा आम लोगों का मानना है और यह बहुत ही स्वागत योग्य बात है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के मामले की गंभीरता को अच्छी तरह से समझा और आधी रात से हीे इस मामले की सुनवाई शुरू कर दी तथा अब आगे की सुनवाई कल सुबह के लिये निर्धारित की गयी है, जिससे देश की आमजनता को पूरा भरोसा है कि न्याय की जरूर ही विजय होगी और बीजेपी व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा एक-के-बाद-एक लगातार की जा रही लोकतंत्र की हत्या पर विराम लगेगा।

अन्त में बी.एस.पी. का यही कहना है कि बीजेपी एण्ड कम्पनी का वर्तमान नेतृत्व देश में सत्ता प्राप्त करने की अपनी पुरानी भूख को मिटाने के क्रम में जिस प्रकार से धन्नासेठों के बल पर देश की सबसे अमीर पार्टी होने के कारण धनबल का नाजायज इस्तेमाल व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केन्द्र की अपनी सत्ता का घोर दुरूपयोग कर्नाटक में भी सरकार बनाने के लिये किया है वह देश के संवैधानिक इतिहास में इमरजेन्सी से भी कहीं ज़्यादा काले अध्याय के रूप में हमेशा याद किया जायेगा।

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा कर्नाटक के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में आज शामिल नहीं होने से इनका यह काला कारनामा किसी भी तरह से कोई कम नहीं होने वाला है। इन्होेंने अपने कृत्यों से देश के पवित्र संविधान व स्थापित लोकतंात्रिक व्यवस्था को आघात पहुँचाने का जो पाप किया है वह कभी भी माफ नहीं किया जा सकता है और जनता भी इसका संज्ञान लिये बिना नहीं रहने वाली है।

वैसे भी यह जगजाहिर है कि देश की जनता ने इनके पापों का संज्ञान गुजरात चुनाव में भी लिये था और अब कर्नाटक में भी लिया है और अब इससे सबक सीख कर आगामी लोकसभा आमचुनाव से पहले शीघ्र ही कुछ महीनों में ही होने वाले मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ विधानसभा के आमचुनाव में भी जरूर लेने वाली है।

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