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बीमार माँ मुझे बेटा पुकारने से भी क़ासिर

हैदराबाद 14 जनवरी: माँ के मुँह से बेटा सुनने के लिए तरसता हूँ मुहम्मद आमिर ख़ान जो दिल्ली के नौजवान हैं ने आज कनवेनशन में इन अलफ़ाज़ के साथ मौजूद सामईन और अहम शख़्सियतों को अशकबार कर दिया ।

हैदराबाद 14 जनवरी: माँ के मुँह से बेटा सुनने के लिए तरसता हूँ मुहम्मद आमिर ख़ान जो दिल्ली के नौजवान हैं ने आज कनवेनशन में इन अलफ़ाज़ के साथ मौजूद सामईन और अहम शख़्सियतों को अशकबार कर दिया ।

मुहम्मद आमिर ख़ान जिन्हों ने अपनी ज़िंदगी के अहम 14 बरस दहश्तगर्दी के झूटे इल्ज़ाम में जेल में गुज़ारे हैं ने बताया कि जब उन की उम्र 17 साल थी उस वक़्त उन्हें दहश्तगर्दी के इल्ज़ाम में गिरफ़्तार किया गया था और उन की उम्र से ज़्यादा दफ़आत-ओ-मुक़द्दमात उन पर लगा दिए गए ।

उन्हों ने बताया कि जेल की सऊबतें और पुलिस की अज़ीयतें तो उन के लिए कोई नई बात नहीं रही चूँकि आए दिन इस तरह की अज़ीयतें ख़ाह बर्क़ी झटके देना या नंगा करना या फिर पेशाब पीने के लिए मजबूर करना हर दहश्तगर्दी के मुक़द्दमा में माख़ूज़ किए जाने वाले नौजवान की दास्तान बिन कर रह गया है लेकिन उन्हों ने जो खोया है वो दुबारा हासिल करना उन के लिए ना मुम्किन है । मु

हम्मद आमिर ख़ान ने बताया कि मेरे जेल जाने के बाद मेरे ख़ानदान का समाजी बाईकॉट शुरू होगया और मेरे वालिद इसी सदमे को लाए दुनिया से चल बसे । वालिद के इंतेक़ाल के चंद माह बाद वालिदा की दिमाग़ की शरियानी फटने से वो एक ज़िंदा लाश की तरह बीमार पड़ी हैं ।

में इन का ईलाज तो करवाता हूँ लेकिन मेरे कान अपनी वालिदा के मुँह से बेटा सुनने के लिए तरसते हैं । उन्हों ने बताया कि 8 माह क़बल उन्हें मर्कज़ी वज़ारत-ए-दाख़िला में बाज़ आबाद कारी की दरख़ास्त दाख़िल की थी लेकिन ताहाल इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई इस सिलसिले में उन्हों ने सदर जमहूरीया हिंद से भी चंद माह क़बल मुलाक़ात की है मगर अब तक कोई मुरासलत नहीं होपाई ।

मुहम्मद आमिर ख़ान ने बताया कि इतनी तकालीफ़ बर्दाश्त करने के बावजूद में ख़ुद को ख़ुशनसीब समझता हूँ कि में हिन्दुस्तान जैसे अज़ीम जमहूरी मुल्क का बाशिंदा हूँ । मुझे आज भी हिन्दुस्तान के दस्तूर और अदालतों पर पूरा भरोसा है चूँकि हिन्दुस्तान के आईन में कोई कमी नहीं है लेकिन इस के नफ़ाज़ में कुछ कोताही ज़रूर है ।

उन्हों ने बताया कि हिन्दुस्तानी इंतेज़ामीया में सब तो नहीं लेकिन कुछ एसे लोग हैं जो अपने इख़्तयारात का ग़लत इस्तेमाल करते हुए नौजवानों को निशाना बनाकर तसकीन हासिल करते हैं।

मुहम्मद आमिर ख़ान ने मुमताज़ समाजी जिहत कार शबनम हाश्मी को याद करते हुए कहा कि आज वो इस कनवेनशन में उन की कमी महसूस कररहे हैं चूँकि उन की रिहाई और क़ानूनी जद्द-ओ-जहद में शबनम हाश्मी ने किलीद किरदार अदा किया है ।

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