Sunday , December 17 2017

“बीवी की खाहिश के बिना सेक्स करना रेप नहीं”

दिल्ली की एक अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि कानूनी तौर पर शौहर और बीवी के बीच बना जबरन जिस्मानी ताल्लुकात रेप के दायरे में नहीं आता है। अदालत ने रेप के इल्ज़ामात आरोपों का सामना कर रहे एक शख्स को बरी कर दिया।

दिल्ली की एक अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि कानूनी तौर पर शौहर और बीवी के बीच बना जबरन जिस्मानी ताल्लुकात रेप के दायरे में नहीं आता है। अदालत ने रेप के इल्ज़ामात आरोपों का सामना कर रहे एक शख्स को बरी कर दिया।

इजाफी सेशन जज विरेंद्र भट्ट ने आफताब आलम को निकाह के बाद अपनी किराएदार के साथ रेप की कोशिश के इल्ज़ाम से बरी कर दिया। अदालत ने कहा, लड़की और मुल्ज़िम ने कानूनी तौर पर 20 जुलाई 2012 को निकाह किया और इसके बाद दोनों के बीच यहां तक कि लड़की की मर्जी के खिलाफ बनाया गया जिस्मानी ताल्लुकात रेप या इस्मतरेज़ी के दायरे में नहीं आता। अदालत ने ज़िक्र किया कि आलम ने 20 जुलाई 2012 को अपनी फुफी के घर में मौलवी की मौजूदगी में निकाह पढा था।

अदालत ने यह भी कहा कि अदालत में अपना बयान दर्ज कराते हुए मुतास्सिरा ने भी कहा है कि मुल्ज़िम ने उसके साथ निकाह किया और वह उसे अपना शौहर कबूल करती है। अदालत ने कहा, मुतास्सिरा की साफगोई से दिए गए उस बयान को ध्यान में रखते हुए यह मानने में कहीं से भी दिक्कत नहीं है कि 20 जुलाई 2012 के बाद दोनों के बीच बना रिश्ता रेप या इस्मतरेज़ी के दायरे में नहीं आता है।

TOPPOPULARRECENT