Saturday , December 16 2017

बीवी को ज़ोद-ओ-कूब(मार फीट) पर सऊदी शौहर को तिलावत क़ुरआन की सज़ा

एक सऊदी शख़्स को अपनी बीवी को ज़ोद-ओ-कूब(मार फीट) करने का जुर्म साबित होने पर एक मुक़ामी अदालत ने तिलावत क़ुरआन मजीद और 2 इस्लामी किताबें जिन का मौज़ू अज़्वाज(मियां बीवी) के दरमयान ताल्लुक़ात है, पढ़ने की सज़ा-दी। इस के बाद इस को इमत

एक सऊदी शख़्स को अपनी बीवी को ज़ोद-ओ-कूब(मार फीट) करने का जुर्म साबित होने पर एक मुक़ामी अदालत ने तिलावत क़ुरआन मजीद और 2 इस्लामी किताबें जिन का मौज़ू अज़्वाज(मियां बीवी) के दरमयान ताल्लुक़ात है, पढ़ने की सज़ा-दी। इस के बाद इस को इमतिहान देना होगा कि इस ने इन किताबों से किया सीखा है और क़ुरआन मजीद से उसे क्या हिदायत हासिल हुई है।

इस शख़्स को क़ुरआन मजीद के 30 पारों में से 5 पारे हिफ़्ज़ करने और 100 अहादीस शरीफ़ याद करने की सज़ा-दी गई है। रोज़नामा गल्फ़ न्यूज़ ने रोज़नामा अलमदीना के हवाला से इस की ख़बर दी है। जदा की एक अदालत ने इस की बीवी को 7 हज़ार रयाल बतौर हर्जाना अदा करने का हुक्म दिया है ताकि वो मुस्तक़बिल में ख़वातीन (औरतों ) के हुक़ूक़ का तहफ़्फ़ुज़ करने को यक़ीनी बना सके।

बीवी ने ओहदेदारों से शिकायत की थी कि एक ज़बानी तकरार के दौरान जबकि इस ने अपने अमुज़ाद भाई के साथ दवाख़ाना जाने की इजाज़त तलब की थी तो इस ने उसे ज़ोद-ओ-कूब(मार फीट) किया था, जिस से वो ज़ख़मी हो गई थी। सऊदी अरब में शरई क़वानीन नाफ़िज़ हैं और उन पर सख़्ती से अमल आवरी भी की जाती है।

मौजूदा सज़ा-इस बात का सबूत हैकि इस्लाम ने ख़वातीन (औरतें ) को इतने ज़्यादा हुक़ूक़ अता किए हैं जबकि मग़रिब हमेशा इस्लाम में ख़वातीन (औरतों ) पर ज़ुलम-ओ-जबर और उन की आज़ादी कुचलने का इल्ज़ाम आइद करता रहता है।

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