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बीवी को नान-ओ-नफ़क़ा ना देने पर शौहर के ख़िलाफ़ ग़ैरज़मानती वारंट

मुंबई 10 अप्रैल : बॉम्बे हाइकोर्ट ने आज एक अहम हुक्म जारी करते हुए वज़ाहत की कि अगर कोई शौहर अपनी बीवी को नान नफ़क़ा फ़राहम करने में कोताही से काम लेगा तो उसके ख़िलाफ़ ग़ैरज़मानती वारंट जारी किया जा सकता है।

मुंबई 10 अप्रैल : बॉम्बे हाइकोर्ट ने आज एक अहम हुक्म जारी करते हुए वज़ाहत की कि अगर कोई शौहर अपनी बीवी को नान नफ़क़ा फ़राहम करने में कोताही से काम लेगा तो उसके ख़िलाफ़ ग़ैरज़मानती वारंट जारी किया जा सकता है।

अदालत के मुताबिक़ प्रोटेक्शन आफ़ वीमन फ्रॉम डोमेस्टिक वॉइलंस ऐक्ट के तहत बीवी शौहर की जानिब से नान नफ़क़ा हासिल करने की हक़दार है। ये हुक्म गुजिश्ता हफ़्ता जस्टिस रोशन दलवी ने उस वक़्त जारी किया जब एक शहरी ने एक जैरीं अदालत की जानिब से ग़ैरज़मानती वारंट के फ़ैसले को चैलेंज करते हुए दरख़ास्त जमा किया था

अपनी बीवी को इसने नान नफ़क़ा की रक़म फ़राहम नहीं की थी लिहाज़ा जैरीं अदालत ने जो फ़ैसला सुनाया था उसे मुंबई के इस शहरी ने चैलेंज किया था। उसकी बीवी ने जैरीं अदालत से रुजू होकर डोमेस्टिक वॉइलंस ऐक्ट के तहत नान नफ़क़ा तलब किया था हालाँकि अदालत ने शौहर को अदायगी का हुक्म दिया था लेकिन शौहर ने अदायगी नहीं की

इस तरह रक़म अपनी वाजिबात के साथ बढ़ कर 56000 रुपये होगई, जिस पर परेशान हाल बीवी ने एक बार फिर अदालत से रुजू होकर शौहर की गिरफ़्तारी का मुतालिबा किया था। तमाम हालात और तमाम सैक्शन के बग़ौर मुताला के बाद ये बात वाज़ह होगई कि शौहर नान नफ़क़ा अदा ना करने का मुल्ज़िम है। लिहाज़ा इसके ख़िलाफ़ ग़ैरज़मानती वारंट की इजराई अमल में आई।

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