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बुजुर्गो पर ज़ुल्म के लिए बहुएं सबसे ज्यादा जिम्मेदार

नई दिल्ली, 15 जून: कहने को तो हमारे मुल्क में बुजुर्गो की बड़ी इज्जत है, लेकिन हकीकत तो यह है कि वे घर की चाहरदीवारियों के अंदर भी महफूज नही हैं। 23 फीसदी मामलों में उन्हें अपने घर वालो के ज़ुल्म का शिकार होना पड़ रहा है। आठ फीसदी तो ऐसे है

नई दिल्ली, 15 जून: कहने को तो हमारे मुल्क में बुजुर्गो की बड़ी इज्जत है, लेकिन हकीकत तो यह है कि वे घर की चाहरदीवारियों के अंदर भी महफूज नही हैं। 23 फीसदी मामलों में उन्हें अपने घर वालो के ज़ुल्म का शिकार होना पड़ रहा है। आठ फीसदी तो ऐसे हैं, जिन्हें घरवालों की पिटाई का रोज शिकार होना पड़ता है।

बुजुर्गो पर ज़ुल्म के लिहाज से मुल्क के 24 शहरों में तमिलनाडु का मदुरई सबसे आगे है, जबकि उत्तर प्रदेश का कानपुर शहर दूसरे नंबर पर है। गैर सरकारी तंज़ीम हेल्प एज इंडिया की ओर से कराए गए इस मुताआलिया ( अध्ययन/Study) में 23 फीसदी बुजुर्गो को ज़ुल्म का शिकार पाया गया। सबसे ज्यादा मामलों में इन्बज़ुर्गों को उनकी बहू सताती है। 39 फीसद मामलों में बुजुर्गो ने अपनी बदहाली के लिए बहुओं को जिम्मेदार माना है।

बूढ़े वालिदैन पर ज़ुल्म के मामले में बेटे भी ज्यादा पीछे नहीं हैं । 38 फीसदी मामलों में उन्हें गुनाहगार पाया गया। मदुरई में 63 फीसदी और कानपुर के 60 फीसदी बुजुर्ग ज़ुल्म के शिकार हो रहे हैं। ज़ुल्म के शिकार होने वालों में से 79 फीसदी के मुताबिक, उन्हें मुसलसल ज़लील किया जाता है। 76 फीसदी को अक्सर बिना किसी वजह के गालियां सुनने को मिलती हैं।

69 फीसदी की जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया जाता। यहां तक कि 39 फीसदी बुजुर्ग पिटाई का शिकार होते हैं। ज़ुल्म के शिकार होने वाले बुजुर्गो में 35 फीसदी ऐसे हैं, जिन्हें तकरीबन रोजाना अपने घरवालो की पिटाई का शिकार होना पड़ता है। हेल्प एज इंडिया के चीफ एग्जीक्यूटिव आफीसर मैथ्यू चेरियन कहते हैं कि इसके लिए बचपन से ही बुजुर्गो की तरफ से जज़बाती नाए जाने की जरूरत है। साथ ही बुजुर्गो को इक्तेसादी ( माली) तौर पर मजबूत बनाने के इख्तेयारात ( Option) पर भी गौर करना होगा।

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