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बुर्क़ा इस्लामी तालीमात के मुग़ाइर ? एक वाइस चांसलर की गुस्ताखाना तक़रीर

हैदराबाद 19 जनवरी (सियासत न्यूज़) मुस्लमानों की इस्लामी तर्ज़-ए-ज़िदंगी पर नुक्ता चीनी करने वालों की फ़हरिस्त तो तवील है । मगर जब मुस्लिम नाम रख कर इस्लामी तालीमात की नफ़ी करने वाले भी हमारे दरमियान मौजूद हैं जो इस्लाम की ग़लत तस्

हैदराबाद 19 जनवरी (सियासत न्यूज़) मुस्लमानों की इस्लामी तर्ज़-ए-ज़िदंगी पर नुक्ता चीनी करने वालों की फ़हरिस्त तो तवील है । मगर जब मुस्लिम नाम रख कर इस्लामी तालीमात की नफ़ी करने वाले भी हमारे दरमियान मौजूद हैं जो इस्लाम की ग़लत तस्वीर पेश करते हैं । ये लोग अपने ज़ाती मुफ़ादात की पूजा करने की आरज़ू में मुस्लमानों और इस्लाम को बदनाम करते हैं ।

यक्म जनवरी को सालार जंग म्यूज़ीयम में मुनाक़िदा एक तक़रीब बउनवान इंटरनेशनल इस्लामी आर्ट एंड कल्चर के जलसा से ख़िताब करते हुए यूनीवर्सिटी के वाइस चांसलर ने बुर्क़ा और इस्लामी तालीमात पर अपनी तहफ़्फ़ुज़ ज़हनी का सबूत दिया और कहा था कि बुर्क़ा इस्लामी तालीमात से मेल नहीं खाता ।

इस सिलसिला में उन्हों ने एक रियासत का हवाला देते हुए अपनी रूह और क़लब पर वाइस चांसलर होने का ज़ोअम या हुकूमत की नज़रों मैं ख़ुद को नूर नज़र बनाने की आरज़ू रखते हुए ये कहदया कि आसाम के एक आलिमे दीन ने कहा है कि आसाम में मुस्लिम ख़वातीन बुर्क़ा नहीं पहनतीं । यहां बुर्क़ा का चलन नहीं है गोया वो ये कह रहे हैं कि पर्दा ख़वातीन का इस्लामी कल्चर नहीं है ।

उन्हों ने मुस्लिम ख़वातीन को बुर्क़ा में कैद करने का सवाल उठाया कि क्या बुर्क़ा मुस्लिम ख़वातीन की तरक़्क़ी में रुकावट नहीं है । उन्हों ने इस्लाम को अमन और कल्चर का मजमूआ क़रारदिया और कहा कि बुर्क़ा का कल्चर इस्लाम में नहीं है । इस्लाम और बुर्क़ा के ख़िलाफ़ वाइस चांसलर मौसूफ़ की ज़हर अफ़्शानी को हाज़रीन ने नोट करने के बजाय इस मसला को दबा दिया गया ।

उस की असल वजह ये है कि इन की अहलिया मुहतरमा गैर मुस्लिम थीं इस का नाम तो मुस्लिम है मगर इन का दिल-ओ-दिमाग़ इस्लामी तालीमात और पर्दा की अहमियत के इम्तियाज़ से क़ासिर है । वो गैर इस्लामी ख़्यालात और मुख़ालिफ़ मुस्लिम नज़रिया को इस लिए अज़ीज़ रखते हैं क्यों कि उन्हें आला ओहदों की लालच है उन की नज़र एक और आला यूनीवर्सिटी के वाइस चांसलर बनने पर टिक्की है ।।

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