बुलंदशहर हिंसा: दंगाइयों ने ऐसे दिया अंजाम, अस्पताल ले जाने से बच सकती थी पुलिस अधिकारी की जान?

बुलंदशहर हिंसा: दंगाइयों ने ऐसे दिया अंजाम, अस्पताल ले जाने से बच सकती थी पुलिस अधिकारी की जान?

बुलंदशहर की स्‍याना कोतवाली के चिंगरावठी चौकी की घटना के बाद कई चौंकाने वाले सच सामने आ रहे हैं। गोकशी की अफवाह के बाद गुस्‍साई भीड़ के उपद्रव के बीच स्‍याना थाने के इंस्‍पेक्‍टर सुबोध कुमार की हत्‍या कर दी गई। साथ ही भीड़ ने एसएचओ के वाहन को भी आग के हवाले कर दिया गया।

घटना के चश्‍मदीद सब इंस्‍पेक्‍टर सुरेश कुमार ने बताया कि करीब 300 से 500 की उग्र भीड़ ने चौकी को घेर लिया था। प्राथमिक रिपोर्ट में सामने आया था कि इंस्पेक्टर की पत्थर या किसी भारी वस्तु मार कर हत्या की गई। हालांकि बाद में पोस्‍टमार्टम में सिर पर चोट के साथ बार्इं आंख के ऊपर गोली लगने की भी पुष्टि हुई।

इस घटना में शादी का कार्ड बांटने निकले एक युवक की भी गोली लगने से मौत हो गई। बुलंदशहर में हुई घटना में पांच पुलिस कर्मी तथा करीब आधा दर्जन आम लोगों को भी मामूली चोटें आई है। भीड़ की हिंसा में कई गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया गया है तथा तीन कारों को आग लगा दी गई।

प्रत्‍यक्षदर्शियों के मुताबिक उग्र भीड़ द्वारा चौकी पर हमले के बाद वहां से जाने के सभी रास्‍ते भी रोक दिए थे। जिसके कारण घायल इंस्‍पेक्‍टर सुबोध कुमार को अस्‍पताल नहीं ले जाया जा सका। पोस्‍टमार्टम में मौत का कारण ज्‍यादा खून बह जाना भी बताया जा रहा है।

हत्‍या के बाद भीड़ ने पुलिस कर्मियों पर पथराव भी किया गया। जिसके चलते इंस्‍पेक्‍टर के ड्राइवर और अन्‍य पुलिस कर्मियों को भागना पड़ा। उपद्रवी भीड़ ने इंस्‍पेक्‍टर के वाहन को भी आग लगा दी।

पुलिस कर्मियों ने क्‍यों छोड़ा इंस्‍पेक्‍टर को अकेला, होगी जांच
मेरठ जोन के एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि इस घटना के बाद 2 लोगों को हिरासत में ले लिया गया गया है। इसके साथ ही एक एसआईटी का भी गठन किया गया है जो यह जांच करेगी कि इंस्‍पेक्‍टर सुबोध कुमार को साथी पुलिस कर्मियों ने क्‍यों और किन परिस्थितियों में अकेला छोड़ा।

इस घटना के चश्‍मदीद सब इंस्‍पेक्‍टर सुरेश कुमार ने इंडिया टीवी को बताया कि घटना के वक्‍त 300 से 500 लोगों की भीड़ ने चौकी को घेर लिया था। भीड़ बेहद हिंसक थी। लोगों ने रास्‍ता जाम कर चौकी पर पथराव शुरू कर दिया।

अचानक हुए हमले से पुलिस कर्मी संभल नहीं पाए। जिसका जहां जगह मिली, वह भाग गया। उन्‍होंन बताया कि सोमवार सुबह पुलिस टीम उस जगह गई थी जहां गोवंश के अवशेष पड़े हुए थे।

पुलिस ने वहां मौजूद लोगों से गोवंश का पोस्‍टमार्टम करवाने की बात कही थी। साथ ही लोगों से इसके संबंध में पूछताछ की, लेकिन बहुत से लोग बहुत सी बातें कर रहे थे। ऐसे में पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।

इंस्‍पेक्‍टर सुबोध कुमार जिनकी हत्‍या सोमवार को भीड़ ने की, वे 2015 में हुए चर्चित इकलाक हत्‍याकांड की जांच कर रहे थे। सुबोध कुमार सिंह दादरी के इकलाख हत्याकांड में 28 सितम्बर 2015 से 9 नवम्बर 2015 तक जाँच अधिकारी थे, इस मामले में चार्जशीट दूसरे जांच अधिकारी ने मार्च 2016 मे दाखिल की थी।

साभार- ‘इंडिया टीवी न्यूज़ डॉट कॉम’

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