Saturday , November 25 2017
Home / Khaas Khabar / बूचड़खानों पर बैन : हज़ारों मुस्लिम परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट

बूचड़खानों पर बैन : हज़ारों मुस्लिम परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट

Pic: Times Now

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आदित्यनाथ योगी की सरकार के सत्ता में आते ही बूचड़खाने बंद करा दिए गए हैं, जिसके विरोध में मीट कारोबारी हड़ताल पर चले गए हैं। मीट कारोबार को सैकड़ों करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है और प्रदेश के सभी जिलों में मीट की जबरदस्त किल्लत हो गई। इस कारोबार से जुड़े 25 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। टाइम्स नाऊ के एक पत्रकार ने मांस विक्रेताओं के साथ एक दिन बिताया और जो भी पाया उसका यहां वर्णन किया है।

 

 

मोहम्मद शाहिद कुरैशी उर्फ़ शाहिद चाचा लखनऊ में बर्फ के बड़े विक्रेताओं में से एक है। वे बताते हैं कि उनके साथ गलत हुआ है। क्योंकि लखनऊ में और पूरे इलाके में बूचड़खाने बंद कर दिए गए हैं इसलिए पहले दिन से ही उनका कारोबार ठप पड़ा है। शाहिद कहते हैं कि उनका पूरा व्यवसाय लखनऊ से निर्यात किए जाने वाले मांस की मात्रा पर निर्भर था, क्योंकि काम उन डिलीवरी वैन के लिए बर्फ की आपूर्ति सुनिश्चित करना था।

 

अब वह सोच में हैं कि वह अपने व्यवसाय को कैसे पटरी पर लाएंगे। उनका कारोबार मटन और मांस के कारोबार से जुड़ा था लेकिन इसके बंद होने से उनका काम बंद पड़ा हैं। इस प्रतिबंध ने शाहिद चाचा जैसे हजारों लोगों की आजीविका पर प्रभाव डाला है। छोटे व्यापारियों के पास कोई विकल्प नहीं है लेकिन वो अब वैकल्पिक नौकरी के बारे में सोच रहे हैं। लखनऊ के बलोजपुरा लेन में सबसे अधिक मांस की दुकानें हैं जो बूचड़खानों पर प्रतिबन्ध के पश्चात बंद हो गई हैं।

 

 

दूसरी बड़ी समस्या हजारों रोज़ मजदूरों की आजीविका की है जो इन खुदरा दुकानों में काम करते थे। एक जौहरी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जिन लोगों के पास कुछ गहने हैं वे उन्हें बेचने के लिए मजबूर हैं जबकि कुछ श्रमिक तो अपनी बुनियादी जरूरतों की चीजों बर्तन, कपड़े आदि को बेच रहे हैं। गहमागहमी वाले इस क्षेत्र में सन्नाटा दिखा। मांस की सभी दुकाने बंद थीं। इस मामले को लेकर लोग सरकार से मिलने की योजना बना रहे हैं।

 

मंगलवार को श्रमिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के साथ मुलाकात कर अपनी बात रखी। बैठक को लेकर उन्होंने कहा कि वे इस मुलाकात के दौरान हुई बातचीत से आंशिक रूप से संतुष्ट हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि इसके लिए वास्तव में कौन जिम्मेदार है? व्यापारियों के अनुसार पिछले तीन साल से उनके लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हुआ है और नतीजतन उनके कारोबार अवैध हो गए हैं।

 

 

 

सवाल यह भी है कि क्यों अखिलेश यादव को जवाबदेह नहीं होना चाहिए कि उनका लाइसेंस नवीकरण क्यों नहीं किया गया? क्या यह तत्कालीन शहरी विकास मंत्री आज़म खान की ज़िम्मेदारी नहीं थी, उनको बताना चाहिए? बहरहाल, मटन की दुकानें बंद हैं और बाजार में भारी मात्रा में मांस की कमी है। खासकर भैंस और बकरे के मांस की और इसके परिणामस्वरूप शहर के कुछ प्रतिष्ठित रेस्तरां और भोजनालय भी इससे अछूते नहीं हैं।

 

 

 

 

लेकिन क्या इन पुराने व्यापारियों की समस्या खत्म होगी? क्या नवाबों के शहर में फिर “बफ कबाब” मिलेगा? क्या योगी आदित्यनाथ सरकार आने वाले दिनों में इनके लाइसेंस का नवीनीकृत करेगी? खैर, ये कुछ सवाल हैं, जिनके उत्तर आने वाले दिनों में साफ़ होंगे जब इसको लेकर बैठक होगी और इस संबंध में आदेश सार्वजनिक किए जाएंगे! लेकिन तब तक तो नवाबी और टुंडे कबाब गायब रहेंगे। मांस के व्यापारी और खुदरा विक्रेता सरकार के उस आदेश का इंतजार कर रहे हैं जिससे उनके चेहरों की मुस्कान लौट आये!

TOPPOPULARRECENT