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बेक़सूर मुस्लिम नौजवान इंतिहाई कर्बनाक हालात से दो-चार

नई दिल्ली, ०४ दिसंबर (पीटीआई) वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने सयासी जमातों को तय्क़कुन दिया है कि हुकूमत एक ऐसा मेकानिज़्म तैयार करेगी जिसके ज़रीया उन मुस्लिम नौजवानों का मसला हल हो सके जिन्हें दहशतगर्दी के इल्ज़ामात साबित ना होने पर भी जे

नई दिल्ली, ०४ दिसंबर (पीटीआई) वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने सयासी जमातों को तय्क़कुन दिया है कि हुकूमत एक ऐसा मेकानिज़्म तैयार करेगी जिसके ज़रीया उन मुस्लिम नौजवानों का मसला हल हो सके जिन्हें दहशतगर्दी के इल्ज़ामात साबित ना होने पर भी जेल में रखा गया है।

वज़ीर-ए-आज़म ने ये यक़ीन दहानी भी कराई कि याददाश्त को ना सिर्फ़ वज़ीर ए दाख़िला तक पहुंचाया जाएगा बल्कि वो वज़ीर दाख़िला से इस मसला पर तबादला ख़्याल करते हुए एक ऐसा मेकानिज़म तैयार करने की ख़ाहिश करेंगे जिससे बेक़सूर मुस्लिम नौजवानों के मुआमला की मूसिर यकसूई हो सके।

सी पी आई एम लीडर सीताराम यचूरी ने आज पार्लीयामेंट ऑफ़िस में वज़ीर-ए-आज़म से मुलाक़ात के बाद ज़राए इबलाग़ के नुमाइंदों से बात चीत करते हुए कहा कि हम ने मनमोहन सिंह से ये भी ख़ाहिश की कि मेकानिज़म की तैयारी मुक़र्ररा वक़्त में होनी चाहीए और उन्होंने इस से इत्तिफ़ाक़ भी किया है ।

इस वफ़द में सीताराम यचूरी के इलावा राम विलास पासवान (एल जे पी) , मनी शंकर (कांग्रेस) डी राजा (सी पी आई) , राम गोपाल यादव (समाजवादी पार्टी) , प्रेम चंद गुप्ता (आर जे डी) , शिवा नंद तीवारी ( जनतादल यू) और डी एम के, नेशनल कान्फ्रेंस, तेलगूदेशम और बहुजन समाज पार्टी से ताल्लुक़ रखने वाले अरकान पार्लेमेंट शरीक थे।

इस वफ़द ने वज़ीर-ए-आज़म से मुलाक़ात करते हुए मुल्क भर में जो बेक़सूर मुस्लिम नौजवान जेलों में हैं उनकी आजलाना रिहाई यक़ीनी बनाने की ख़ाहिश की। याददाश्त में कहा गया है कि कई साल तक जिस्मानी और नफ़सियाती अज़ियत के बाद उन बेक़सूर मुस्लिम नौजवानों को हमारे तकलीफ़देह सुस्त क़ानूनी अमल की बिना ताख़ीर से रिहाई मिल पाई। इस वजह से इन नौजवानों को अपनी उम्र के कीमती साल तकलीफ़ , अज़ियत और गैर ज़रूरी इहानत के साथ साथ ख़ानदान से अलग थलग होकर गुज़ारना पड़ा ।

उनकी तकलीफ़करब और शदीद एहसासात को अलफ़ाज़ में बयान नहीं किया जा सकता। सीताराम यचूरी ने कहा कि मुस्लिम नौजवानों को जिन्हें मक्का मस्जिद , मालेगावं , अजमेर और नांदेड़ धमाकों के शुबा में गिरफ़्तार किया गया है, हनूज़ जेलों में हैं ।

हालाँकि तहकीकात से ये साबित हो चुका है कि दीगर दाएं बाज़ू के ग्रुप्स इन बम धमाकों के ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि एक सियोल समाज के लिए ये नाक़ाबिल-ए-क़बूल है। जम्हूरियत में भी इसे क़बूल नहीं किया जाता। ये किसी मख़सूस मज़हब का मुआमला नहीं है बल्कि हमारे बुनियादी जमहूरी हक़ का मसला है जो दस्तूर के तहत हर इंसान को फ़राहम किया गया है।

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