बेबस मुहाजिरीन फिर शाम वापसी पर मजबूर

बेबस मुहाजिरीन फिर शाम वापसी पर मजबूर
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उर्दन में मुक़ीम शामी मुहाजिरीन इमदाद में कमी और घर की याद के हाथों मजबूर हो कर अपने घरों को लौट रहे हैं। ख़ाना जंगी के शिकार मुल्क-ए-शाम में सूरते हाल बद से बदतरीन हो रही है, मगर इन मुहाजिरीन के पास कोई और रास्ता नहीं है।

मुख़्तलिफ़ ख़बररसां इदारों के मुताबिक़ शाम लौटने वाले ये मुहाजिरीन वो अफ़राद हैं, जिनके पास यूरोप ले जाने वाले इन्सानी स्मगलरों को देने के लिए पैसे नहीं, या वो उर्दन में मुहाजिर बस्तीयों को दी जाने वाली इमदाद में बड़ी कटौतियों की वजह से मजबूर हो चुके हैं, या उन्हें अपने घर की याद सताए जा रही है।

एक ऐसे वक़्त पर जब यूरोप की जानिब हिज्रत करने वाले अफ़राद की तादाद बढ़ रही है, शाम के हमसाया ममालिक में उन मुहाजिरीन के लिए बर्दाश्त की कमी के इशारे मिल रहे हैं।

शुमाली उर्दन में अक़वामे मुत्तहिदा के ज़ेरे निगरानी चलने वाले मुहाजिर कैंप ज़ातारी के एक 47 साला रिहायशी अदनान के मुताबिक़, हमें इमदाद की फ़राहम रोक दी गई है। मैंने अपने ख़ानदान का नाम शाम वापिस जाने के लिए लिखवा दिया है।

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