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बे – कार सियासतदान

मुल्क के सबसे बड़े इन्तेख़ाबात में एमएलए से लेकर विज़ारते उज्मा के दावेदार तक नेता जनता के दरबार में हाज़िर हैं। इन उम्मीदवारों ने करोड़ों रुपयों की दौलत और आमदनी का एलान तो किया है, लेकिन ताज्जुब इस बात का है कि इनमें से कई लोगो

मुल्क के सबसे बड़े इन्तेख़ाबात में एमएलए से लेकर विज़ारते उज्मा के दावेदार तक नेता जनता के दरबार में हाज़िर हैं। इन उम्मीदवारों ने करोड़ों रुपयों की दौलत और आमदनी का एलान तो किया है, लेकिन ताज्जुब इस बात का है कि इनमें से कई लोगों के पास अपनी कार नहीं है।

पूरे दस सालों तक इख्तेदार का सुख भोगने वाले यूपीए की चेयरपर्सन व कांग्रेस की सदर सोनिया गांधी से लेकर विज़ारते उज्मा के दावेदार नरेंद्र मोदी तक कई लोगों के नाम उस फेहरिस्त में शामिल हैं, जिनके पास कार नहीं है।

क़ाबिले जिक्र है कि 2012 के असेम्बही चुनावों में मनीनगर विधानसबा सीट के उम्मीदवार के तौर जब नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने अपना पर्चा दाखिल किया था, उन्होंने अपने एफिडेविड़ में मोटर/कार के कॉलम में `सिफर’ लिखा था। चुनावी एफिडेविड में सोनिया गांधी के पास भी कार नहीं है और 2009 के आम चुनावों में अमेठी लोकसभा से पर्चा दाखिल किये गये एफिडेविड में राहुल गांधी के पास भी कार नहीं है।

इधर तेलंगाना के पहले सीएम की दावेदारी करने वाले के. चंद्रशेखर राव ने हालांकि अभी पर्चा ए नामज़दगी दाखिल नहीं किया है, लेकिन 2009 के चुनावों में दाखिल एफिडेविड के मुताबिक उनके पास भी कार नहीं है।

सीनियर कांग्रेसी नेता एस. जयपाल रेड्डी भी अपने पास निजी कार नहीं रखते और हैदराबाद के एमपी असदुद्दीन ओवैसी के पास भी अपनी कार नहीं है। आन्ध्र प्रदेश के तीन चीफ मिनिस्टरों की कैबिनेट में मिनिस्टर रहे एम. मुकेश गौड़ के पास पिछले इन्तेखाबात में कार थी, लेकिन इस बार उनके पास भी उनकी कार नहीं है।

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