बैंक में ‘कैश नहीं है’ के स्लोगन सरकार के दावों की पोल खोलती है

बैंक में ‘कैश नहीं है’ के स्लोगन सरकार के दावों की पोल खोलती है

नई दिल्ली: देश भर में नोटबंदी से कैश की समस्या तो उत्पन्न हुई ही है इसके साथ साथ शेयर मार्केट पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है. गुरुवार को दिल्ली और मुंबई के बैंकों के खुलने के कुछ ही घंटों में कैश खत्म हो गया. दरअसल जितने कैश की जरूरत है उसकी 15 पर्सेंट ही सप्लाई रह गई है. इस बीच विपक्ष ने नोटबंदी को ठीक ढंग से लागू नहीं करने पर सरकार पर हमला जारी रखा है.

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में कहा कि केंद्र सरकार से स्कीम को लागू करने में ऐतिहासिक मिस मैनेजमैंट हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि इससे देश की जीडीपी ग्रोथ में 2 पर्सेंट या इससे अधिक की गिरावट आ सकती है. उधर एक ट्रक यूनियन ने कहा कि कैश की कमी के चलते गाड़ियों को चलाना मुश्किल हो गया है और सड़क से सामान की आवाजाही ठप पड़ सकती है.

नेशनल दस्तक के अनुसार, एक प्रावेइट बैंक के एग्जक्यूटिव ने बताया कि रोज हमारा कैश कम पड़ता जा रहा है. हम रोज जितना कैश मिलने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन वह अब तक नहीं मिला हैं. इससे पहले सरकार ने बैंकों को ग्रामीण क्षेत्रों में कैश की सप्लाई बढ़ाने का निर्देश दिया था, जहां पूरी इकनॉमी नकद-नारायण से चलती है.
एक अन्य बैंकर ने भी बताया कि कैश कम मिल रहा है. हमें ब्रांच और एटीएम भी मैनेज करना पड़ रहा है और अब ग्रामीण इलाकों में भी कैश की सप्लाई बढ़ाने को कहा गया है जबकि हमें जितना नकदी दी जा रही है वो काफी नहीं है. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बैंको में अब तक 6 लाख करोड़ से अधिक नोट जमा हो चुके हैं, लेकिन आरबीआई ने जरुरत के मुताबिक नए नोट प्रिंट नहीं किए हैं इसलिेए कैश की किल्लत बनी हुई है.

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