बैतुल-मुक़द्दस में रमज़ान , एक लाख मुसलमानों ने नमाज़ अदा की

बैतुल-मुक़द्दस में रमज़ान , एक लाख मुसलमानों ने नमाज़ अदा की
मस्जिद ए अक़्सा बैतुल-मुक़द्दस में रमज़ान उल-मुबारक का रूह प्रवार आग़ाज़ हुआ । एक लाख से ज़ाइद ( ज़्यादा) मुसलमानों ने नमाज़ अदा की और इबादत ज़िक्र-ओ-अज़कार के साथ इस मुतबर्रिक ( पवित्र/ पाक) माह में फ़लस्तीनी अवाम की कसीर ( ज़्यादा) तादाद मस्

मस्जिद ए अक़्सा बैतुल-मुक़द्दस में रमज़ान उल-मुबारक का रूह प्रवार आग़ाज़ हुआ । एक लाख से ज़ाइद ( ज़्यादा) मुसलमानों ने नमाज़ अदा की और इबादत ज़िक्र-ओ-अज़कार के साथ इस मुतबर्रिक ( पवित्र/ पाक) माह में फ़लस्तीनी अवाम की कसीर ( ज़्यादा) तादाद मस्जिद ए अक़्सा में नमाज़ों की अदायगी और रोज़ा की कुशादगी के लिये ख़ुसूसी एहतिमाम करती है ।

इसराईली पुलिस के एक तर्जुमान के मुताबिक़ एक लाख से ज़ाइद मुसलमानों ने रमज़ान उल-मुबारक के मुक़द्दस व मुबारक महीने के पहले जुमा के रोज़ यरूशलम के क़दीम (पुराने) शहर में अल-अक़सा मस्जिद के अहाते में नमाज़ अदा की। पुलिस तर्जुमान मुक्की रो सिन्फ़े लड ने कहा कि दरयाए अरदन के मक़बूज़ा ( अधिकृत) मग़रिबी किनारे और मशरिक़ी बैत उल-मुक़द्दस से करीबन एक लाख फ़लस्तीनी मुसलमान नमाज़ जुमा की अदायगी के लिए गुँम्बद सक्खर में जमा हुए।

अल-अक़सा मस्जिद के अहाते के मुसलमान अल-हरम अल शरीफ़ से पुकारते हैं और सऊदी अरब में मक्ता अल मुकर्रमा और मदीना अल मुनव्वरा के बाद मुसलमानों का तीसरा मुक़द्दस तरीन मुक़ाम है।लेकिन यहूदी इसी इलाक़े को गुँबद सक्खर पुकारते हैं,ये दूसरे यहूदी गुँबद की जगह है जिसे रोमनों ने सत्तर बाद अज़ विलादत मसीह में मिस्मार ( नष्ट/ ध्वस्त) कर दिया और ये यहोदीयो की मुक़द्दस तरीन जगह है।

तर्जुमान ने कहा कि इमसाल ( इस साल) माह मुक़द्दस के पहले जुमा की नमाज़ की अदायगी पर कोई नाख़ुशगवार वाक़िया पेश नहीं आया। इसराईली पुलिस और फ़ौज ने माह रमज़ान उल-मुबारक के दौरान अल-अक़सा में इबादत करने वाले दरयाए अरदन के मक़बूज़ा ( अधिकृत) मग़रिबी किनारे के फ़लस्तीनियों पर आइद पाबंदियां ख़त्म कर दी हैं।

इलाक़े के ज़्यादा तर मुस्लमानों ने जुमा अल-मुबारक को माह स्याम ( रमज़ान) का पहला रोज़ा रखा,हुक्काम ने कहा कि वो पूरे माह स्याम के दौरान इबादत करने के लिए दरयाए अरदन के मक़बूज़ा मग़रिबी किनारे से रोज़ाना पाँच हज़ार फ़लस्तीनियों को मस्जिद अल-अक़सा आने की इजाज़त देंगे।

इस के इलावा अज़ीज़-ओ-क़ारिब के हमराह मस्जिद अल-अक़सा आने वालों पर आइद पाबंदीयां भी खत्म कर दी जाएंगी।

ताहम चालीस साल से कम उम्र के फ़लस्तीनियों पर अब भी मस्जिद ए अक़सा जाने पर पाबंदी है। मुक्की रोसन फीड ने कहा कि किसी नाख़ुशगवार हादिसे से बचने के लिए क़दीम ( पुराने / प्राचीन) शहरी मस्जिद अल-अक़सा के गिर्द-ओ-नवाह और यरूशलम मशरिक़ी हिस्से में अला अल-सुबह हज़ारों की तादाद में सिक्योरिटी फ़ोर्सेस के अहलकार तैनात कर दीए गए।

इसराईल आम तौर पर दरयाए अरदन के मक़बूज़ा मग़रिबी किनारे और ग़ज़ा की पट्टी के फ़लस्तीनियों को अपने मुख़तस करदा इलाक़े यह मशरिक़ी येरूशलम में दाख़िले की इजाज़त नहीं देता है। इस ने 1967 की अरब इसराईल जंग में इस पर क़बज़ा कर लिया था,बादअज़ां उसे ज़म ( संयुक़्त) कर लिया गया।

दरी असना इसराईल ने रमज़ान उल-मुबारक के मुक़द्दस महीने में जज़बा ख़ैर सगाली के तौर पर टैक्स और महसूलात से होने वाली आमदनी फ़लस्तीनी अथार्टी को मुंतक़िल कर दी है।ये बात मक़बूज़ा ( अधिकृत) मग़रिबी किनारे पर फ़लस्तीनी सिवीलियन उमूर ( कठिनाइयो/ मुश्किलो) से निमटने वाले इदारे के तर्जुमान ने बताई है।

गाय अनबर ने कहा कि बुध को इसराईल ने 160 मिलियन सटेकल(40मिलियन डालर,32.7 मिलियन यूरो) फ़लस्तीनी अथार्टी के हवाले करदे जिसे जुलाई की तनख़्वाहों की अदायगी के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।ये फ़ंड आम तौर पर अगस्त के दूसरे हफ़्ते में अदा किए जाने होते हैं।

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