Thursday , June 21 2018

बैन-उल-अक़वामी(अंतरराष्ट्रीय) यौम लड़कीयां बचपन की शादी असल मौज़ू

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा पहले बैन-उल-अक़वामी(अंतरराष्ट्रीय)यौम लड़कीयां पर जो आज मनाया जा रहा है , बचपन की शादीयों के इंसिदाद (रोकथाम) को अपना मर्कज़ी मौज़ू क़रार देगा और हिंदूस्तान , बंगला देश और सोमालीया जैसे ममालिक में दरपेश चैलेंजस

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा पहले बैन-उल-अक़वामी(अंतरराष्ट्रीय)यौम लड़कीयां पर जो आज मनाया जा रहा है , बचपन की शादीयों के इंसिदाद (रोकथाम) को अपना मर्कज़ी मौज़ू क़रार देगा और हिंदूस्तान , बंगला देश और सोमालीया जैसे ममालिक में दरपेश चैलेंजस को उजागर करेगा।

इस बुनियादी इंसानी हक़ की ख़िलाफ़ वरज़ी के ख़िलाफ़ जद्द-ओ-जहद करेगा जो लड़की की पूरी ज़िंदगी को मुतास्सिर करती है। बचपन की शादी के इंसिदाद (रोकथाम) केलिए जो इंसानी हुक़ूक़ की एक ख़िलाफ़ वरज़ी है और लड़की की ज़िंदगी के हर पहलू को मुतास्सिर करती है, जद्द-ओ-जहद ज़रूरी है।

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