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बोसनिया: मलादिच के ख़िलाफ़ मुक़द्दमा शुरू

बोसनियाई सरब फ़ौजी कमांडर रातकू मलादिच के ख़िलाफ़ जंगी जराइम और नस्ल कुशी (क़त्ल आम ) समेत इंसानियत के ख़िलाफ़ जराइम के 11 इल्ज़ामात के तहत मुक़द्दमा आज से शुरू हो गया। उसे 1990की दहाई की बलक़ान जंग के आख़िरी बड़े मुजरिम के तौर पर नीद

बोसनियाई सरब फ़ौजी कमांडर रातकू मलादिच के ख़िलाफ़ जंगी जराइम और नस्ल कुशी (क़त्ल आम ) समेत इंसानियत के ख़िलाफ़ जराइम के 11 इल्ज़ामात के तहत मुक़द्दमा आज से शुरू हो गया। उसे 1990की दहाई की बलक़ान जंग के आख़िरी बड़े मुजरिम के तौर पर नीदरलैंड के शहर दी हेग में जंगी जराइम से मुताल्लिक़ अक़वाम-ए-मुत्तहिदा (यू एन ओ) की अदालत में मुक़द्दमे का सामना है।

इस पर 1995मैं सरब नतज़ा के इलाक़ा में सात हज़ार मुस्लमान लड़कों और मर्दों के क़त्ल -ए आम में कलीदी किरदार अदा करने का इल्ज़ाम है। कहा जाता है कि ये यूरोप में दूसरी जंग अज़ीम के बाद ढाए जाने वाले सब से ख़ौफ़नाक मज़ालिम थे। मलादिच पंद्रह बरस तक मफ़रूर (फरार)रहने के बाद गुज़श्ता बरस मई में सरब फ़ौज के हाथों गिरफ़्तार हुआ था जिस के बाद उसे दी हेग भेज दिया गया था।

कारदच को 2008 में गिरफ़्तार किया गया था और इस पर भी मुक़द्दमा चलाया जा रहा है। मलादिच के ख़िलाफ़ इल्ज़ामात की तादाद तक़रीबन निस्फ़ (आधा) कर दी गई है ताकि मुक़द्दमे की कार्रवाई तेज़ी से चल सके। इस मुक़द्दमे में इस्तिग़ासा(वकील) ने 400 से ज़ाइद गवाहों के ब्यानात रिकार्ड किए हैं।

मदलिच पर इल्ज़ाम है कि इस ने बोसनियाई मुस्लमानों और करोशयाई बाशिंदों के ख़िलाफ़ नस्ल कुशी (क़त्ल आम ) की मुहिम चलाई और 1992से शुरू होने वाली इस मुहिम का नुक़्ता उरूज 1995 में मशरिक़ी बोसनिया मैं सरब नतज़ा का वाक़िया था जहां हज़ारों मुस्लमान मर्दों को हलाक कर के इजतिमाई क़ब्रों में दफ़ना दिया गया था।

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