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भय और दहशत की वजह से गाँव छोड़कर जा रहे हैं बिसाहड़ा के मुसलमान

नोएडा (उप्र) : अखलाक की हत्या के  आरोपी रविन का अंतिम संस्कार तीन दिनों बाद भी नहीं किया गया है | जिसकी वजह से बिसाहड़ा के मुस्लिम परिवारों में भय और दहशत का माहौल है और वह गाँव छोड़कर जा रहे हैं |

जनसत्ता की एक खबर के मुताबिक़ अखलाक की हत्या के  आरोपी रविन का अंतिम संस्कार तीन दिनों बाद भी नहीं किया जा सका है | जिसकी वजह से गाँव में तनाव बरकरार है और बिसाहड़ा के मुस्लिम परिवारों में भय और दहशत का माहौल है। ‘द हिन्दू’ ने गांव के मौलवी दाऊद के हवाले से लिखा है कि प्रशासन, मुस्लिमों और अल्पसंख्यकों को कड़ी सुरक्षा मुहैया करा रहा है | इसके बावुजूद भी किसी भी अनहोनी की आशंका की वजह से गाँव के मुसलमान घर छोड़कर जा रहे हैं |

अखलाक़ हत्याकांड के आरोप में जेल में बंद  रविन को तबियत ख़राब हो गयी थी | जिसके बाद उसे नोएडा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था | बाद में तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल में भर्ती कराया गया था | जहाँ किडनी फेल हो जाने की वजह से उसकी मौत हो गयी थी | गाँव वालों का आरोप था कि रविन कि मौत पुलिस कि पिटाई से हुई है | जबकि प्रशासन ने ऐसे किसी भी आरोप से इनकार किया था |

रविन की मौत  के बाद से ही हिन्दूवादी संगठनों ने गाँव में डेरा डाल रखा है | विहिप नेता साध्वी प्राची भी दो दिनों से वहां मौजूद हैं | मुजफ्फरनगर दंगों की आरोपी साध्वी ने विरोध कर रहे लोगों को संबोधित करते हुए रविन की मौत का बदला लेने के लिए उकसाया है| पुलिस की मौजूदगी में ही कपिल भाटी नाम के एक अन्य स्थानीय नेता ने भी रविन की मौत का बदला लेने का आह्वान किया है | इसबीच, हजारों ग्रामीण रवि को शहीद करार देते हुए उसके शव को तिरंगा में लपेटा हुआ है और सरकार से एक करोड़ रुपये के मुआवजा देने की मांग लेकर धरना पर बैठे हैं |  ग्रामीण अखलाक हत्याकांड में नामजद सभी 17 लोगों को तुरंत रिहा करने की भी मांग कर रहे हैं |

गौरतलब है कि रविन अखलाक की हत्या के आरोप में जेल में बंद था | पिछले साल सितंबर में गौमांस खाने के शक में मोहम्मद अखलाक की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी |

 

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