Tuesday , December 12 2017

भाकपा के बिहार बंद का जुज़वी असर

बिहार में बिजली कंपनियों की मनमानी और बिजली की मसायलों को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के ऐलान पर सनीचर को बिहार बंद का जजुई असर देखा जा रहा है।

बिहार में बिजली कंपनियों की मनमानी और बिजली की मसायलों को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के ऐलान पर सनीचर को बिहार बंद का जजुई असर देखा जा रहा है।

बंद का भाकपा के असर वाले बेगूसराय और मधुबनी जिले समेत कुछ जिलों में मिलाजुला जबकि दीगर जिलों में जजुई असर है। दारुल हुकूमत पटना में बंद हिमायतों ने जुलूस निकाला और सड़कों पर कुछ देर के लिए ट्राफिक रोक दिया। रेल का चलने पर बंद का कोई असर नहीं पड़ा है।

बेगूसराय और समस्तीपुर से हासिल रिपोर्ट के मुताबिक शहर के बड़े कारोबारी अदारे बंद हैं जबकि छोटी दुकानें खुली है। सड़कों पर गाड़ियों का आना जाना कम देखा जा रहा हैं जबकि सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों में कामकाज आम तौर से चल रहा है।

मालूम हो के बिहार में बिजली की तक़सीम कंपनियों की मनमानी, फीस में मौजूजह इजाफा, सारफीन की इस्तहसाल वगैरह के मुखालिफत में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने 18 जनवरी को बिहार बंद का ऐलान किया था। बंद को सीपीएम और माले का भी हिमायत थी है। सीपीआई ने पटना समेत तमाम अहम शहरों में पूरी तरह चक्का जाम करने का फैसला लिया था।

सीपीआई के सीनियर लीडर बद्री नारायण लाल और राजेंद्र प्रसाद सिंह का कहना है कि बिलिंग और फीस उगाही का काम प्राइवेट फ्रेंचाइजी को देने से पहले से परेशान लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई है। ये फ्रेंचाइजी कंपनियां अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए नाजायज तरीका अपना रही हैं।

बे गुनाह सारफीन को गलत केस में फंसाने से रोकने और मीटर रीडिंग में धांधली वगैरह दीगर गलत कार्रवाई को रोकने के लिए पार्टी ने बंद का ऐलान किया है। इसको लेकर पार्टी ने वजीरे आला को पहले मेमोरेंडम भी सौंपा था।

पार्टी की मांग पर पहले सीपीएम और बाद में माले ने भी अपने हिमायत का ऐलान किया है। माले ने तमाम ब्लॉकों में मुजाहेरा और 22 जनवरी को आइसा-इंनौस के बैनर तले सीएम का घेराव करने का फैसला किया है।

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