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भाजपा के ख़िलाफ़ बोलने की सज़ा? 30 साल पुराने केस में नवजोत सिंह सिंद्धू पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शूरू

पंजाब के मंत्री और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में 30 साल पुराने रोड रेज के एक केस में मंगलवार को अंतिम सुनवाई शुरू हो गई है। इस केस में सिद्धू मुख्य आरोपी हैं, उनके ऊपर 65 वर्षीय एक बुजुर्ग की हत्या करने का आरोप लगा है। इस केस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सिद्धू के राजनीतिक करियर पर खासा प्रभाव पड़ सकता है। अगर फैसला सिद्धू के विरोध में आता है तो उनका राजनीतिक करियर तबाह हो जाएगा। इस केस में जस्टिस जे चेमलेश्वर और संजय के कौल ने सुनवाई शुरू कर दी है। शुरुआती तर्क-वितर्क में सिद्धू के वकील ने उनके पक्ष में दलीलें पेश कीं। इस केस में कांग्रसे नेता के साथ उनके दोस्त रुपिंदर सिंह संधू भी आरोपी हैं। वरिष्ठ वकील आरएस चीमा ने मंगलवार को सिद्धू की तरफ से दलीलें दी और उनके साथ ही रुपिंदर के वकील आर बसाल्ट ने भी अपने तर्क रखे।

मामला करीब 30 साल पुराना
नवजोत सिंह सिद्धू का रोड रेज मामला करीब 30 साल पुराना है। इस मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने दिसंबर 2006 में अपना फैसला सुनाते हुए उन्हें और उनके दोस्त को दोषी ठहराया था, लेकिन सिद्धू हाईकोर्ट के फैसले से सहमत नहीं थे। उसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के बाद उनकी सजा पर रोक लगा दी गई। अब उसी मामले में सुनवाई शुरू हो गई है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जे चेल्मेश्वर और संजय कौल की पीठ सिद्धू के इस केस की सुनवाई कर रही है।

ये है पूरा मामला
बताया जाता है कि 27 दिसंबर 1988 को नवजोत सिंह सिद्धू और गुरनाम सिंह नाम के एक बुजुर्ग व्यक्ति के बीच कार पार्किंग को लेकर खूब कहासुनी हुई और यह कहासुनी धीरे धीरे मारपीट में तब्दील हो गई। इस मारपीट में गुरनाम सिंह को गंभीर चोट आई। उस दौरान मौके पर मौजूद गुरनाम सिंह के भांजे ने बताया कि सिद्धू ने गुरनाम को मारकर सड़क पर गिरा दिया। इसके तुरंत बाद ही गुरनाम को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इससे पहले ही वो दम तोड़ चुके थे। जिस समय यह घटना हुई उस वक्त वहां सिद्धू के साथ उनके एक दोस्त रुपिंदर सिंह सिंधू भी मौजूद थे।

हाईकोर्ट में दोषी
इसलिए उस समय दोनों पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज हुआ, लेकिन साल 1999 में सेशन कोर्ट ने सिद्धू का केस खत्म कर दिया गया। कोर्ट का कहना था कि आरोपी के खिलाफ पक्के सबूत नहीं हैं और सिर्फ शक के आधार पर केस नहीं चलाया जा सकता। इसके बाद साल 2002 में राज्य सरकार ने एक बार फिर सिद्धू के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की और दिसंबर 2006 में हाईकोर्ट ने सिद्धू और उनके दोस्त को दोषी करार देते हुए दोनों को 3-3 साल की सजा सुनाई और एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया।

सुप्रीम कोर्ट में अपील
हाईकोर्ट के फैसले से असहमत होकर सिद्धू ने फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू की सजा पर रोक लगा दी। अब इस मामले सुनवाई शुरू हो गई है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस मामले में जल्द ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ सकता है।

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